बिहार के 264 निकायों पर सुप्रीम कोर्ट का चाबुक: रिहायशी इलाकों में चल रहीं अवैध दुकानें, कोचिंग और जिम तुरंत होंगे सील; 'पिक एंड चूज' पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के 264 नगर निकायों समेत देशभर के रिहायशी इलाकों में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को तत्काल सील करने का सख्त आदेश दिया है। 23 नवंबर से पहले प्रोग्रेस रिपोर्ट तलब की गई है।
बिहार के 264 निकायों पर आदेश लागू: सुप्रीम कोर्ट ने कहा—रिहायशी इलाकों में अवैध कमर्शियल गतिविधि तुरंत सील करें
पटना / नई दिल्ली: रिहायशी कॉलोनियों में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से चल रहे कोचिंग सेंटर, जिम, शोरूम, दुकानें और गोदामों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिन इलाकों को मास्टर प्लान या सरकारी रिकॉर्ड में केवल 'आवासीय' चिन्हित किया गया है, वहां गैर-कानूनी ढंग से चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को पहले चरण में ही तत्काल प्रभाव से सील किया जाए।
यह आदेश बिहार के सभी 264 शहरी स्थानीय निकायों (नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों) समेत देश के अन्य प्रमुख शहरों पर लागू हो गया है। शीर्ष अदालत ने अधिकारियों को 23 नवंबर से पहले की गई कार्रवाई की प्रोग्रेस रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के 4 बड़े निर्देश
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│ सुप्रीम कोर्ट के अहम दिशा-निर्देश │
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│ 1. तत्काल सीलिंग: │ 2. मुकदमों का बहाना खत्म: │
│ • आवासीय आवंटन वाले परिसरों में │ • यदि संपत्ति पर कोर्ट में विवाद │
│ अवैध व्यापार मिलने पर सीधे सील │ लंबित है, तब भी सीलिंग नहीं रुकेगी।│
│ │ │
│ 3. 'पिक एंड चूज' पर रोक: │ 4. मिक्स-लैंड यूज पर राहत: │
│ • आम नागरिक पर कार्रवाई और │ • जहां श्रेणी स्पष्ट नहीं है, वहां │
│ रसूखदारों को छूट देने वाले │ फिलहाल यथास्थिति बनी रहेगी; │
│ अफसरों पर कोर्ट सख्त एक्शन लेगा।│ दंडात्मक सीलिंग अभी नहीं होगी। │
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1. पहले चरण में सीधे सीलिंग, कोई रियायत नहीं
पीठ ने आदेश दिया कि जहां राज्य सरकार द्वारा अनुमति केवल आवासीय उपयोग के लिए दी गई है, वहां किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि नहीं चलेगी। जांच के दौरान यदि आवासीय परिसर में दुकानें, कोचिंग, जिम या व्यावसायिक दफ्तर संचालित पाए जाते हैं, तो नगर निकाय प्रशासन को बिना किसी देरी के संपत्ति को सील करना होगा।
2. 'पिक एंड चूज' नीति अपनाने वाले अफसरों पर गिरेगी गाज
अक्सर देखा जाता है कि अतिक्रमण और सीलिंग अभियानों में नगर निकाय छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई कर देते हैं, जबकि रसूखदारों और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त बड़े संस्थानों को छोड़ दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर सख्त चेतावनी दी है। अदालत ने कहा कि कार्रवाई पारदर्शी और समान रूप से होनी चाहिए। चुनिंदा तरीके से की गई भेदभावपूर्ण कार्रवाई को अदालत अवमानना के रूप में देखेगी।
3. 'कोर्ट में केस पेंडिंग है' का बहाना अब नहीं चलेगा
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी जमीन या इमारत को लेकर कोई दीवानी विवाद (Title Suit) या निजी पक्षों/सरकार के बीच कोई मुकदमा कोर्ट में लंबित है, तो अधिकारी उसकी आड़ में सीलिंग नहीं टाल सकते। यदि संपत्ति का उपयोग स्वीकृत नक्शे या लैंड-यूज प्लान के विपरीत हो रहा है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई अनिवार्य रूप से होगी।
4. मिक्स-लैंड यूज (Mixed-Use) वाले इलाकों को फिलहाल फौरी राहत
अदालत ने उन इलाकों को अस्थायी राहत दी है जहां भूमि का उपयोग स्पष्ट रूप से तय नहीं है (यानी जहां मिश्रित उपयोग की संभावना है)। ऐसे क्षेत्रों में प्रशासनिक कागजी कार्रवाई और जांच जारी रहेगी, लेकिन फिलहाल वहां दंडात्मक तोड़फोड़ या तत्काल सीलिंग जैसी कार्रवाई नहीं होगी।
बिहार के शहरों पर क्या असर पड़ेगा?
पटना, मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर और पूर्णिया जैसे बड़े शहरों में बोरिंग रोड, कंकड़बाग, राजाबाजार और शास्त्रीनगर जैसी प्रमुख आवासीय कॉलोनियों में हजारों की संख्या में कोचिंग संस्थान, अस्पताल, ब्यूटी पार्लर और रेस्टोरेंट संचालित हो रहे हैं।
मास्टर प्लान का खुला उल्लंघन होने से इन कॉलोनियों में जाम, पार्किंग संकट और जल-निकासी की भारी समस्याएं खड़ी हो गई हैं। 264 निकायों के प्रशासनिक अमले के लिए 23 नवंबर की समयसीमा अग्निपरीक्षा जैसी साबित होगी, क्योंकि अब तक स्थानीय स्तर पर राजनीतिक दबाव के कारण ऐसी संपत्तियों पर हाथ डालने से अधिकारी बचते रहे हैं।





