भारत-नेपाल एक्सप्रेसवे का बड़ा एलान: अब पशुपतिनाथ से बैद्यनाथ धाम पहुँचें सिर्फ 3 घंटे में, जानें पूरा रूट
भारत-नेपाल के बीच 250 किमी लंबे 'पशुपतिनाथ-बैद्यनाथ धाम हाई-स्पीड कॉरिडोर' की घोषणा। अब काठमांडू से देवघर का सफर 14 घंटे के बजाय सिर्फ 3 घंटे में होगा पूरा। जानें रूट और पूरी जानकारी।
नई दिल्ली/पटना: भारत और नेपाल के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देने के लिए केंद्र और बिहार सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। बिहार के पथ निर्माण मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने विधानसभा में 'पशुपतिनाथ-बैद्यनाथ धाम हाई-स्पीड कॉरिडोर' (Pashupatinath-Baidyanath Dham High-Speed Corridor) के निर्माण की घोषणा की है।
इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर और झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम के बीच की दूरी महज कुछ घंटों में सिमट जाएगी।
14 घंटे का सफर अब सिर्फ 3 घंटे में
वर्तमान में देवघर से काठमांडू की दूरी लगभग 534 किलोमीटर है, जिसे तय करने में सड़क मार्ग से करीब 13 से 14 घंटे का लंबा समय लगता है।
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नया रूट: प्रस्तावित हाई-स्पीड कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 250 किलोमीटर होगी।
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समय की बचत: आधुनिक तकनीक और सीधे रूट के कारण यह सफर अब महज 2.5 से 3 घंटे में पूरा किया जा सकेगा।
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दूरी में कमी: यह नया एक्सप्रेसवे मौजूदा सड़क मार्ग की तुलना में दूरी को लगभग आधा कर देगा।
एक्सप्रेसवे का प्रस्तावित रूट (Route Details)
यह एक्सप्रेसवे नेपाल से शुरू होकर बिहार के कई जिलों से गुजरते हुए झारखंड में प्रवेश करेगा।
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प्रारंभ: काठमांडू (नेपाल) से।
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भारत में प्रवेश: नेपाल के भीमनगर और बीरपुर के रास्ते बिहार के सुपौल जिले में।
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बिहार के जिले: सुपौल के बाद यह मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया, मुंगेर और बांका जिलों से होकर गुजरेगा।
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अंतिम पड़ाव: झारखंड का देवघर जिला (बाबा बैद्यनाथ धाम)।
बजट और विकास की योजना
बिहार सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पथ निर्माण विभाग का 8,260 करोड़ रुपये से अधिक का बजट पेश किया है। इस बजट में इस कॉरिडोर को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
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केंद्र को प्रस्ताव: परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव (DPR) केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेज दिया गया है।
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धार्मिक पर्यटन: इस कॉरिडोर का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के शिव भक्तों के लिए दो ज्योतिर्लिंगों और प्रमुख धामों के बीच यात्रा को सुगम बनाना है।
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कांवड़ियों के लिए विशेष सुविधा: सुल्तानगंज से देवघर के बीच पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं (कांवड़ियों) के लिए एक्सप्रेसवे के किनारे एक अलग सर्विस रोड बनाने की भी योजना है।
आर्थिक और सामरिक महत्व
यह एक्सप्रेसवे केवल पर्यटन के लिहाज से ही नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टिकोण से भी गेम-चेंजर साबित होगा:
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व्यापार में वृद्धि: भारत और नेपाल के बीच व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी।
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रोजगार के अवसर: बिहार और झारखंड के पिछड़े जिलों में ढांचागत विकास होगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा।
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कनेक्टिविटी: इसे रक्सौल-हल्दिया और दरभंगा-अमास जैसे अन्य प्रमुख एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जाएगा, जिससे पूरे पूर्वी भारत में सड़कों का एक जाल बिछ जाएगा।
'पशुपतिनाथ-बैद्यनाथ धाम हाई-स्पीड कॉरिडोर' न केवल दो देशों को जोड़ने वाली सड़क है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आस्था का सेतु बनेगा। यदि केंद्र से इसे जल्द हरी झंडी मिल जाती है, तो अगले 4-5 वर्षों में श्रद्धालु सुबह पशुपतिनाथ में जल चढ़ाकर दोपहर तक बाबा बैद्यनाथ के दर्शन कर सकेंगे।





