गौरव गोगोई विवाद: पत्नी के ISI कनेक्शन के आरोपों से गरमाई असम की राजनीति

असम की राजनीति में मचा भूचाल! गौरव गोगोई की पत्नी पर ISI से संबंध के आरोप पर सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा दावा। जानिए पूरा मामला, राजनीतिक असर और सच्चाई।

गौरव गोगोई विवाद: पत्नी के ISI कनेक्शन के आरोपों से गरमाई असम की राजनीति
असम के मुख्यमंत्री हिमंता ने कहा कि गौरव गोगोई को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है क्योंकि इससे चुनाव से पहले राजनीति करने के आरोप लग सकते हैं।

असम की राजनीति एक बार फिर तीखी बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप के दौर में पहुंच गई है। इस बार विवाद का केंद्र बने हैं कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई, जिनकी पत्नी को लेकर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े होने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

यह मामला सिर्फ व्यक्तिगत नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक विश्वास से भी जुड़ा बताया जा रहा है, जिससे यह विवाद और भी संवेदनशील बन गया है।


आरोप कैसे शुरू हुए?

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने एक सार्वजनिक मंच पर यह दावा किया कि गौरव गोगोई की पत्नी का अतीत कुछ विदेशी संगठनों से जुड़ा रहा है, जिनका संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से होने का संदेह जताया गया।

हालांकि, उन्होंने किसी प्रत्यक्ष सबूत का खुलासा नहीं किया, लेकिन यह बयान राजनीतिक गलियारों में हलचल मचाने के लिए काफी था।


कौन हैं एलिज़ाबेथ कोलबर्न गोगोई?

गौरव गोगोई की पत्नी एलिज़ाबेथ कोलबर्न गोगोई एक विदेशी नागरिक रही हैं और बाद में उन्होंने भारतीय नागरिकता प्राप्त की।
उनका अकादमिक और सामाजिक क्षेत्र में कार्य का लंबा अनुभव रहा है।

सीएम द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद उनके पिछले प्रोजेक्ट्स और संगठनों से जुड़े कार्यों को लेकर सवाल उठाए जाने लगे हैं।


 गौरव गोगोई का जवाब

गौरव गोगोई ने इन आरोपों को निराधार, दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया।
उन्होंने कहा कि यह हमला न केवल उनकी पत्नी पर है बल्कि उनके पूरे परिवार की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार के पास कोई ठोस प्रमाण हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए।


 कांग्रेस बनाम बीजेपी

इस मुद्दे पर कांग्रेस ने बीजेपी पर राजनीतिक साजिश रचने का आरोप लगाया, जबकि बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

दोनों दलों के बीच तीखी बयानबाज़ी जारी है।


 राजनीतिक असर

यह विवाद ऐसे समय पर सामने आया है जब असम में आगामी चुनावों की चर्चा तेज़ हो रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।


 कानूनी और नैतिक पहलू

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक किसी आरोप को प्रमाणित नहीं किया जाता, तब तक किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।