IBCA ने बाघ संरक्षण की सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रदर्शन के लिए कर्नाटक को चुना
अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (IBCA) ने बाघ संरक्षण की सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रदर्शन के लिए कर्नाटक का चयन किया। जानिए क्यों कर्नाटक बना वैश्विक मॉडल।
अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (International Big Cat Alliance – IBCA) ने भारत के कर्नाटक राज्य को बाघ संरक्षण की सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) के प्रदर्शन के लिए चुना है। यह चयन न केवल कर्नाटक के लिए गर्व का विषय है, बल्कि भारत की वन्यजीव संरक्षण नीति और जमीनी स्तर पर किए गए प्रभावी प्रयासों की वैश्विक मान्यता भी है।
कर्नाटक लंबे समय से भारत के अग्रणी बाघ-आवास राज्यों में शामिल रहा है। यहां के संरक्षित वन क्षेत्र, वैज्ञानिक प्रबंधन, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और सख्त निगरानी प्रणाली ने इसे बाघ संरक्षण का एक आदर्श मॉडल बना दिया है।
IBCA क्या है और इसका उद्देश्य
IBCA यानी International Big Cat Alliance एक वैश्विक पहल है, जिसका उद्देश्य बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, जगुआर और चीता जैसी बड़ी बिल्लियों (Big Cats) के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना है।
इस मंच के जरिए सदस्य देश:
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संरक्षण से जुड़ी सफल रणनीतियों को साझा करते हैं
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तकनीकी और वैज्ञानिक सहयोग बढ़ाते हैं
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अवैध शिकार और आवास क्षरण जैसी चुनौतियों से मिलकर निपटते हैं
IBCA द्वारा कर्नाटक का चयन यह दर्शाता है कि राज्य की संरक्षण नीतियां वैश्विक स्तर पर अपनाए जाने योग्य हैं।
क्यों चुना गया कर्नाटक
कर्नाटक को बाघ संरक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण चुना गया है। इसके पीछे कई ठोस वजहें हैं:
1. मजबूत बाघ आबादी
कर्नाटक भारत के उन राज्यों में शामिल है जहां बाघों की संख्या लगातार स्थिर और कई क्षेत्रों में बढ़ती हुई देखी गई है।
2. प्रमुख टाइगर रिज़र्व
राज्य में बांदीपुर, नागरहोल, बीआरटी और काली जैसे प्रसिद्ध टाइगर रिज़र्व स्थित हैं, जो आपस में जुड़े हुए लैंडस्केप बनाते हैं। इससे बाघों का प्राकृतिक आवागमन सुरक्षित रहता है।
3. वैज्ञानिक और तकनीकी प्रबंधन
कैमरा ट्रैप, जीआईएस मैपिंग, ड्रोन निगरानी और नियमित जनगणना जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है।
4. स्थानीय समुदायों की भागीदारी
वन संरक्षण में स्थानीय लोगों को रोजगार, वैकल्पिक आजीविका और जागरूकता कार्यक्रमों से जोड़ा गया है, जिससे मानव–वन्यजीव संघर्ष में कमी आई है।
बाघ संरक्षण की सर्वोत्तम प्रथाएं
IBCA के मंच पर कर्नाटक जिन सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रदर्शित करेगा, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
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एंटी-पोचिंग नेटवर्क: प्रशिक्षित गश्ती दल और खुफिया तंत्र
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हैबिटेट मैनेजमेंट: जल स्रोतों का विकास और घासभूमि सुधार
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कॉरिडोर संरक्षण: वन्यजीव गलियारों की पहचान और सुरक्षा
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मानव–वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन: त्वरित मुआवजा और चेतावनी प्रणाली
ये उपाय न केवल बाघों के लिए, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए फायदेमंद साबित हुए हैं।
भारत की वैश्विक छवि को मजबूती
कर्नाटक का चयन भारत को वैश्विक वन्यजीव संरक्षण नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करता है। इससे:
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अन्य देश भारतीय मॉडल से सीख सकेंगे
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अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निवेश के अवसर बढ़ेंगे
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जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा मिलेगी





