नौकरी छोड़ी तो 2 दिन में मिलेगा पूरा पैसा! जानें नए लेबर कोड के वो नियम जो बदल देंगे कर्मचारियों की किस्मत
नए लेबर कोड के तहत अब कंपनी छोड़ने के 48 घंटों के भीतर होगा फुल एंड फाइनल सेटलमेंट। जानें नए श्रम कानूनों के प्रमुख प्रावधान, सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव और ग्रेच्युटी के नए नियम।
नए लेबर कोड का बड़ा धमाका: इस्तीफा देने के 48 घंटे में होगा 'फुल एंड फाइनल' सेटलमेंट, जानें क्या-क्या बदलेगा?
नई दिल्ली: भारत में नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी और काम के घंटों से लेकर सैलरी तक में बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नए लेबर कोड (New Labour Codes) के लागू होने के बाद निजी और सरकारी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए नियम पूरी तरह बदल जाएंगे।
सबसे बड़ा और राहत देने वाला बदलाव 'फाइनल सेटलमेंट' को लेकर है। अब तक कर्मचारियों को अपनी बकाया राशि (Full and Final Settlement) के लिए महीनों चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन नए नियमों के बाद यह बीते जमाने की बात हो जाएगी।
1. 2 दिन के भीतर पूरा हिसाब (Settlement in 48 Hours)
नए लेबर कोड के प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी इस्तीफा देता है, उसे नौकरी से निकाला जाता है या वह खुद नौकरी छोड़ता है, तो कंपनी को उसकी आखिरी वर्किंग डेट के 2 कार्य दिवसों (Working Days) के भीतर सारा बकाया पैसा चुकाना होगा। वर्तमान में कंपनियां इसके लिए 30 से 90 दिनों का समय लेती हैं।
2. सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव (Salary Structure Change)
नए नियमों के तहत आपकी 'बेसिक सैलरी' आपके कुल वेतन (CTC) का कम से कम 50% होनी चाहिए। इसका सीधा असर आपके पीएफ (PF) और ग्रेच्युटी पर पड़ेगा:
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PF में बढ़ोतरी: बेसिक सैलरी बढ़ने से आपका पीएफ योगदान बढ़ जाएगा, जिससे रिटायरमेंट फंड ज्यादा जमा होगा।
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इन-हैंड सैलरी: बेसिक सैलरी बढ़ने और पीएफ कटने के कारण आपकी हाथ में आने वाली (Take-home) सैलरी थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन भविष्य की बचत ज्यादा होगी।
3. वर्किंग आवर्स और छुट्टियों का नया गणित
नए श्रम कानूनों में काम के घंटों को लेकर भी लचीलापन दिया गया है:
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4-डे वर्क वीक: कंपनियां चाहें तो हफ्ते में 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी का विकल्प दे सकती हैं। हालांकि, इस स्थिति में प्रतिदिन 12 घंटे काम करना अनिवार्य होगा।
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सालाना छुट्टियां: अब साल में 45 दिन की छुट्टी के बजाय कम से कम 30 दिन की छुट्टियों को अगले साल के लिए 'Carry Forward' किया जा सकेगा। साथ ही, साल के अंत में बची हुई छुट्टियों का पैसा (Leave Encashment) लेना भी आसान होगा।
4. ग्रेच्युटी के लिए अब 5 साल का इंतज़ार नहीं?
अभी तक ग्रेच्युटी पाने के लिए एक ही कंपनी में 5 साल लगातार काम करना जरूरी होता है। लेकिन नए कोड में फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉई (Contractual Workers) के लिए इस समय सीमा को खत्म किया जा सकता है। अब एक साल की नौकरी पर भी प्रो-राटा (अनुपात) के आधार पर ग्रेच्युटी मिल सकेगी।
5. सामाजिक सुरक्षा (Social Security)
नए कोड में पहली बार 'गिग वर्कर्स' (जैसे जोमैटो-स्विगी के डिलीवरी पार्टनर्स) और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। उन्हें बीमा, स्वास्थ्य लाभ और अन्य सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
विशेषज्ञों का मानना है कि नए लेबर कोड से व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business) बढ़ेगी और कर्मचारियों के शोषण पर लगाम लगेगी। हालांकि, इन-हैंड सैलरी में कमी मध्यम वर्ग के लिए तात्कालिक चुनौती हो सकती है, लेकिन लंबी अवधि में यह रिटायरमेंट को सुरक्षित बनाने वाला कदम है।





