भारत-रूस में फिर होगी ऐतिहासिक डिफेंस डील? BRICS समिट के लिए दिल्ली पहुंचे पुतिन, Su-57 और S-400 पर नजर!

BRICS समिट 2026 के लिए रूसी राष्ट्रपति पुतिन दिल्ली पहुंच चुके हैं। PM मोदी के साथ बैठक में Su-57 फाइटर जेट और S-400 मिसाइल सिस्टम पर बड़ी डील की संभावना है।

भारत-रूस में फिर होगी ऐतिहासिक डिफेंस डील? BRICS समिट के लिए दिल्ली पहुंचे पुतिन, Su-57 और S-400 पर नजर!
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भारत-रूस के बीच Su-57 फाइटर जेट डील संभव: BRICS समिट के लिए दिल्ली पहुंचे राष्ट्रपति पुतिन; क्या 2016 की गोवा समिट का इतिहास दोहराएगा?

नई दिल्ली/डिफेंस डेस्क: 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत की राजधानी नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। भारत मंडपम में आयोजित हो रहे इस उच्चस्तरीय सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होने जा रही है।

रणनीतिक विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की निगाहें इस मुलाकात पर टिकी हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि 2016 के गोवा ब्रिक्स सम्मेलन में जिस तरह भारत और रूस के बीच S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की ऐतिहासिक डील हुई थी, ठीक उसी तर्ज पर इस बार रूस के 5th-जनरेशन स्टेल्थ फाइटर जेट Su-57 (सुखोई-57) को लेकर बड़ा समझौता हो सकता है।

1. 2016 की गोवा समिट का इतिहास दोहराने की तैयारी?

वर्ष 2016 में जब भारत ने गोवा में BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी, तब PM मोदी और पुतिन ने रणनीतिक सुरक्षा को नई ऊंचाई देते हुए $5.43 बिलियन (लगभग ₹40,000 करोड़) के S-400 ट्रायम्फ सौदे पर हस्ताक्षर किए थे।

आज एक दशक बाद, जब भारत फिर से ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है, रक्षा संबंधों को एक नई दिशा देने की तैयारी है:

  • S-400 की बची हुई डिलीवरी: रूस द्वारा S-400 की अंतिम स्क्वाड्रन की आपूर्ति पूरी करने पर स्पष्ट रोडमैप।

  • 5 अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन: भारतीय रक्षा मंत्रालय के समक्ष रूस द्वारा पेश किए गए नए प्रस्ताव पर चर्चा।

  • Su-57 फाइटर जेट ऑफर: रूस की ओर से भारत को अपने सबसे घातक 5th-जनरेशन स्टेल्थ विमान Su-57 के संयुक्त उत्पादन (Joint Production) का सीधा प्रस्ताव।

2. क्या है Su-57 फाइटर जेट की खासियत? (Why India Needs Su-57)

भारतीय वायुसेना (IAF) में लड़ाकू विमानों की स्क्वाड्रन क्षमता को मजबूत करने और स्वदेशी AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) प्रोजेक्ट के तैयार होने तक के अंतर को भरने के लिए Su-57 एक मजबूत दावेदार बनकर उभरा है।

क्षमता/फीचर Su-57 की खासियत
जनरेशन व स्टेल्थ 5th-जनरेशन ट्विन-इंजन लो-ऑब्जर्वेबल (Stealth) फाइटर
अधिकतम स्पीड मैख 2.0 (लगभग 2,458 किमी/घंटा)
हथियार प्रणाली अति-दूर तक मार करने वाली R-37M एयर-टू-एयर मिसाइलें
तकनीक हस्तांतरण रूस द्वारा भारत में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) और लोकल असेंबली का ऑफर

3. 'सुपर सुखोई' और ब्रह्मोस अपग्रेड भी एजेंडे में शामिल

क्रेमलिन (रूस के राष्ट्रपति कार्यालय) के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के अनुसार, दोनों देशों के बीच रक्षा वार्ता सिर्फ नए जेट्स खरीदने तक सीमित नहीं है:

  1. $11 बिलियन का 'सुपर सुखोई' प्रोजेक्ट: भारत के मौजूदा Su-30MKI बेड़े को उन्नत राडार, नए एवियोनिक्स और आधुनिक मिसाइलों से लैस करके 'सुपर सुखोई' में अपग्रेड करने का प्रस्ताव।

  2. BrahMos-NG का विकास: ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के हल्के और अधिक घातक संस्करण (BrahMos Next Generation) को हल्के फाइटर जेट्स (जैसे तेजस) पर तैनात करने का खाका।

  3. बाय-सेलर मॉडल से जॉइंट प्रोडक्शन: दोनों देश रक्षा उपकरणों के केवल खरीदार-विक्रेता रिश्ते से आगे बढ़कर 'मेक इन इंडिया' के तहत संयुक्त विकास और तीसरे देशों को निर्यात (Defence Exports) पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

4. पश्चिमी प्रतिबंधों और अमेरिकी दबाव के बीच द्विपक्षीय वार्ता

अमेरिकी प्रशासन द्वारा रूसी कच्चे तेल और रक्षा व्यापार पर लगातार बनाए जा रहे दबाव के बीच पुतिन का यह भारत दौरा काफी अहम माना जा रहा है। भारत ने बार-बार स्पष्ट किया है कि उसकी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) और ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

रूस से राष्ट्रीय मुद्राओं (रुपया-रूबल) में व्यापार जारी रखने और रक्षा आपूर्ति को बिना किसी बाधा के पूरा करने के लिए दोनों नेता वित्तीय व व्यावहारिक समाधानों पर सहमति बना सकते हैं।

भारत की वायु रक्षा के लिए निर्णायक मोड़

यदि नई दिल्ली में हो रही इस द्विपक्षीय वार्ता में Su-57 के टेक्नोलॉजी ट्रांसफर या S-400 की अतिरिक्त यूनिट्स पर सहमति बनती है, तो यह भारत की रक्षा क्षमताओं के लिए 2016 के बाद का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित होगा।