बिटकॉइन क्रैश: क्रिप्टो बाजार से $2 ट्रिलियन साफ, ट्रंप के चुनाव के बाद सबसे बड़ी गिरावट के क्या हैं कारण?
बिटकॉइन में ऐतिहासिक गिरावट ने क्रिप्टो बाजार से 2 ट्रिलियन डॉलर साफ कर दिए हैं। ट्रंप के चुनाव के बाद आई इस सबसे बड़ी मंदी के पीछे क्या कारण हैं? जानिए इस लेख में।
दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी, बिटकॉइन (Bitcoin) इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। हाल ही में आई भारी बिकवाली ने न केवल निवेशकों के होश उड़ा दिए हैं, बल्कि वैश्विक क्रिप्टो मार्केट कैप से लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर (करीब 166 लाख करोड़ रुपये) पूरी तरह साफ कर दिए हैं।
नवंबर 2024 में डोनाल्ड ट्रंप की चुनावी जीत के बाद से यह डिजिटल एसेट्स के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। ट्रंप के कार्यकाल में जिस 'क्रिप्टो बुल रन' की उम्मीद की जा रही थी, वह अब बड़े संकट में नजर आ रही है।
बिटकॉइन की कीमतों में बड़ी गिरावट
ताजा आंकड़ों के अनुसार, बिटकॉइन अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई $1,26,000 (जो 2025 के अंत में देखी गई थी) से गिरकर अब $64,000 के स्तर के नीचे पहुंच गया है। पिछले कुछ ही दिनों में इसमें 13% से ज्यादा की एकदिनी गिरावट देखी गई, जिसने बाजार में 'पैनिक सेलिंग' (घबराहट में बिकवाली) का माहौल पैदा कर दिया है।
इस ऐतिहासिक गिरावट के मुख्य कारण (Main Triggers)
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कोई एक कारण नहीं बल्कि कई वैश्विक और तकनीकी कारकों का मिला-जुला असर है:
1. फेडरल रिजर्व में बदलाव और केविन वार्श की नियुक्ति
अमेरिकी केंद्रीय बैंक (Federal Reserve) के अगले अध्यक्ष के रूप में केविन वार्श (Kevin Warsh) के नाम की चर्चा ने निवेशकों को डरा दिया है। वार्श को एक 'हॉक' (सख्त नीति समर्थक) माना जाता है। बाजार को डर है कि उनके आने से फेड की बैलेंस शीट छोटी की जाएगी और तरलता (Liquidity) कम होगी, जो क्रिप्टो जैसी जोखिम भरी संपत्तियों के लिए बुरा संकेत है।
2. ट्रंप के टैरिफ (Tariffs) का डर
राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा चीन, कनाडा और मैक्सिको से होने वाले आयात पर भारी टैरिफ (सीमा शुल्क) लगाने की धमकियों ने वैश्विक व्यापार युद्ध की स्थिति पैदा कर दी है। इस अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने बिटकॉइन जैसे रिस्की एसेट्स से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की ओर रुख करना शुरू कर दिया है।
3. बड़े संस्थानों (Institutional Investors) का बाहर निकलना
पहले के क्रैश में अक्सर रिटेल निवेशक डरते थे, लेकिन इस बार Spot Bitcoin ETFs से भारी निकासी (Outflows) देखी गई है। जनवरी 2026 में ही $3 बिलियन से अधिक की निकासी हुई है। जब बड़े संस्थान अपना पैसा निकालते हैं, तो बाजार की तरलता खत्म होने लगती है और कीमतें तेजी से गिरती हैं।
4. लीवरेज्ड लिक्विडेशन (Leveraged Liquidations)
फ्यूचर्स मार्केट में $700 मिलियन से अधिक के ट्रेड लिक्विडेट (जबरन बंद) हो गए। कई व्यापारियों ने उधार लेकर (High Leverage) बड़ी पोजीशन ली हुई थी। जैसे ही बिटकॉइन थोड़ा गिरा, उन पोजीशन के अपने आप बंद होने से कीमतों पर और दबाव पड़ा और यह 'चेन रिएक्शन' की तरह फैल गया।
5. टेक और AI सेक्टर में मंदी
बिटकॉइन का प्रदर्शन पिछले कुछ समय से तकनीकी शेयरों (Tech Stocks) के साथ जुड़ा हुआ है। Nvidia जैसे बड़े AI शेयरों में आई गिरावट और सॉफ्टवेयर सेक्टर में कमजोरी ने क्रिप्टो बाजार पर भी बुरा असर डाला है।
निवेशकों के लिए क्या है सबक?
यह क्रैश इस बात की याद दिलाता है कि क्रिप्टोकरेंसी अभी भी अत्यधिक अस्थिर संपत्ति है। ट्रंप प्रशासन की 'क्रिप्टो-फ्रेंडली' नीतियों के बावजूद, वैश्विक आर्थिक स्थितियां और मौद्रिक नीतियां किसी भी समय बाजार का रुख पलट सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक बाजार में स्थिरता नहीं आती, तब तक नए निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए और 'पैनिक सेल' से बचना चाहिए।
Disclaimer: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय सलाह नहीं माना जाना चाहिए। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।





