गुजरात में सावज की सुरक्षा पर संकट: अमरेली और गिर सोमनाथ में दो शेरों की मौत, बढ़ा वन विभाग का तनाव
गुजरात के अमरेली और गिर सोमनाथ जिलों में दो एशियाई शेरों की दर्दनाक मौत की खबर सामने आई है। एक शेर खुले कुएं में गिरने से मरा, जबकि दूसरा बिजली के अवैध बाड़ की चपेट में आ गया। जानें पूरी घटना और वन विभाग की कार्रवाई।
एशियाई शेरों के एकमात्र निवास स्थान गुजरात के गिर क्षेत्र से एक बार फिर दुखद खबर सामने आई है। पिछले 48 घंटों के भीतर अमरेली और गिर सोमनाथ जिलों में दो अलग-अलग घटनाओं में दो शेरों की मौत हो गई है। ये मौतें प्राकृतिक नहीं बल्कि 'अप्राकृतिक' (Unnatural) कारणों से हुई हैं, जिसने वन्यजीव प्रेमियों और प्रशासन के बीच चिंता की लहर पैदा कर दी है।
पहली घटना: खुले कुएं ने ली ढाई साल के शेर की जान
अमरेली जिले के लिलिया तालुका के कणकोट गांव में एक नर शेर की मौत खुले कुएं में गिरने से हो गई। मिली जानकारी के अनुसार:
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मृत शेर की उम्र लगभग 2 से 2.5 वर्ष बताई जा रही है।
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वह शिकार की तलाश में रिहायशी इलाके के पास आया था और अंधेरे में खुले कुएं को नहीं देख पाया।
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वन विभाग की टीम ने शव को कुएं से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। गिर क्षेत्र में खुले कुएं लंबे समय से शेरों के लिए "मौत का फंदा" बने हुए हैं।
दूसरी घटना: बिजली के करंट से तड़पकर मरा शेर
दूसरी घटना गिर सोमनाथ जिले के कोडीनार तालुका के काज गांव की है। यहाँ एक किसान द्वारा खेत की सुरक्षा के लिए लगाई गई अवैध इलेक्ट्रिक फेंसिंग (बिजली की बाड़) की चपेट में आने से एक वयस्क शेर की मौत हो गई।
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वन विभाग की जांच में पता चला है कि किसान मानसिंह झाला ने जंगली सूअरों और नीलगाय से फसल बचाने के लिए तार में करंट दौड़ाया था।
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शेर इस जाल में फंस गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
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विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए आरोपी किसान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
गिर में शेरों की मौत के बढ़ते आंकड़े
हाल के वर्षों में गुजरात विधानसभा में पेश किए गए आंकड़े बताते हैं कि शेरों की कुल मौतों में अप्राकृतिक कारणों (जैसे कुएं में गिरना, ट्रेन से कटना, या करंट लगना) का हिस्सा बढ़ रहा है।
| कारण | मौत का प्रभाव |
| खुले कुएं | गिर क्षेत्र में हजारों कुएं अब भी बिना मुंडेर (Parapet wall) के हैं। |
| इलेक्ट्रिक फेंसिंग | किसानों द्वारा फसल बचाने के लिए किया गया अवैध जुगाड़ शेरों के लिए घातक है। |
| वाहन दुर्घटना | नेशनल हाईवे पर बढ़ता ट्रैफिक भी युवा शेरों के लिए खतरा है। |
विशेषज्ञों की राय और प्रशासन की चेतावनी
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे शेरों की आबादी (वर्तमान में लगभग 891) गिर के जंगलों से निकलकर राजस्व क्षेत्रों (Revenue Areas) की ओर बढ़ रही है, मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) बढ़ता जा रहा है।
अमरेली के 'लायन नेचर फाउंडेशन' के अध्यक्ष नथालाल सुखड़िया के अनुसार, "प्रशासन को तुरंत खुले कुओं को ढकने के अभियान में तेजी लानी चाहिए। जब तक कुएं सुरक्षित नहीं होंगे, हमारे सावज ऐसे ही अपनी जान गंवाते रहेंगे।"





