भारत-अमेरिका व्यापारिक पुनर्जागरण: ट्रम्प का टैरिफ धमाका और भारत की कूटनीतिक जीत
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18% किया। विदेश मंत्री एस जयशंकर की अमेरिका यात्रा और NSA अजित डोभाल के सऊदी दौरे से जुड़ी पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
नई दिल्ली/वाशिंगटन: फरवरी 2026 की शुरुआत वैश्विक राजनीति में भारत के बढ़ते प्रभाव की गवाह बन रही है। एक तरफ वाशिंगटन में विदेश मंत्री एस. जयशंकर 'क्रिटिकल मिनरल्स' पर महत्वपूर्ण समझौते कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ सऊदी अरब में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को साध रहे हैं। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ (शुल्क) को 50% से घटाकर 18% करने के ऐलान ने द्विपक्षीय व्यापार को एक नई संजीवनी दी है।
1. ट्रम्प का ऐतिहासिक ऐलान: 18% टैरिफ और व्यापारिक समझौता
2 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद एक बड़े व्यापार समझौते की घोषणा की।
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टैरिफ में बड़ी कटौती: ट्रम्प ने घोषणा की कि भारत पर लगाए गए 25% के "रेसिप्रोकल टैरिफ" को घटाकर 18% कर दिया जाएगा। इससे पहले अगस्त 2025 में भारत पर प्रभावी टैरिफ 50% तक पहुँच गया था।
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रूसी तेल और दंडात्मक शुल्क: ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद पर लगा 25% का दंडात्मक शुल्क भी खत्म किया जाएगा, बशर्ते भारत अपनी तेल खरीद का रुख अमेरिका और वेनेजुएला की ओर मोड़े।
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$500 बिलियन का लक्ष्य: ट्रम्प के अनुसार, भारत ने अगले कुछ वर्षों में अमेरिका से ऊर्जा, कृषि और तकनीक के क्षेत्र में 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है।
2. अजित डोभाल का 'साइलेंट पुश': "झुकेंगे नहीं, पर रुकेंगे भी नहीं"
ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, इस व्यापार समझौते की नींव सितंबर 2025 में ही पड़ गई थी जब NSA अजित डोभाल ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की थी।
खबरों के मुताबिक, डोभाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि भारत किसी के दबाव में आकर समझौता नहीं करेगा और यदि शर्तें अनुकूल नहीं रहीं, तो भारत ट्रम्प के कार्यकाल खत्म होने (2029) तक इंतजार करने को तैयार है। इस "हार्ड नेगोशिएशन" (कठोर सौदेबाजी) ने ही अमेरिका को अपनी शर्तों में ढील देने पर मजबूर किया, जिसका नतीजा आज 18% टैरिफ के रूप में सामने है।
3. एस. जयशंकर का वाशिंगटन दौरा: क्रिटिकल मिनरल्स और 'FORGE'
इसी दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर वाशिंगटन में उच्च स्तरीय बैठकों में व्यस्त हैं। उन्होंने 'Critical Minerals Ministerial' में भाग लिया और अमेरिका की नई पहल 'FORGE' का समर्थन किया।
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रणनीतिक साझेदारी: जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता केवल आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सप्लाई चेन और रक्षा साझेदारी को मजबूत करने का माध्यम है।
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संसद में स्पष्टता: जयशंकर ने मीडिया से कहा कि व्यापार समझौते की बारीकियों पर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और USTR काम कर रहे हैं, जिससे भारत के कृषि और डेयरी क्षेत्र के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
4. अजित डोभाल का सऊदी दौरा: सुरक्षा और शांति का संदेश
व्यापारिक सफलताओं के बीच, अजित डोभाल अचानक सऊदी अरब के दौरे पर पहुँचे हैं।
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क्षेत्रीय सुरक्षा: रियाद में उनकी मुलाकात सऊदी एनएसए मुसैद बिन मोहम्मद अल-ऐबान से हुई।
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गाजा शांति योजना: चर्चा का मुख्य केंद्र गाजा शांति योजना (Gaza Peace Plan 2.0) और पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौते के भारत पर प्रभाव रहे।
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आतंकवाद पर कड़ा रुख: दोनों देशों ने हाल ही में हुए पहलगाम और लाल किला आतंकी हमलों की कड़ी निंदा की और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
5.रणनीतिक संतुलन और व्यापार
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ऊर्जा सुरक्षा: टैरिफ कटौती के बदले भारत द्वारा अमेरिका से तेल और गैस की खरीद बढ़ाना एक 'विन-विन' स्थिति है। इससे भारत की रूस पर निर्भरता कम होगी और अमेरिका को एक बड़ा बाजार मिलेगा।
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तकनीकी हस्तांतरण: जयशंकर की वाशिंगटन यात्रा का मुख्य केंद्र iCET (इनीशिएटिव ऑन क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी) को आगे बढ़ाना है, ताकि सेमीकंडक्टर और AI क्षेत्र में भारत-अमेरिका की जुगलबंदी चीन को चुनौती दे सके।
6.क्षेत्रीय प्रभाव
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सऊदी-भारत-यूएस धुरी: डोभाल की सऊदी यात्रा और जयशंकर की अमेरिका में सक्रियता यह संकेत देती है कि भारत IMEC (भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा) को पुनर्जीवित करने के लिए पर्दे के पीछे काम कर रहा है।





