भारत-चीन संबंधों में सुधार का नया दौर: राजदूत जू फेइहोंग ने द्विपक्षीय व्यापार और सहयोग पर दिया जोर

चीनी राजदूत जू फेइहोंग ने भारत-चीन संबंधों में सुधार के नए स्तर की घोषणा की है। जानें कैसे 155.6 अरब डॉलर का रिकॉर्ड व्यापार और मोदी-शी की मुलाकात बदल रही है दोनों देशों के रिश्ते।

भारत-चीन संबंधों में सुधार का नया दौर: राजदूत जू फेइहोंग ने द्विपक्षीय व्यापार और सहयोग पर दिया जोर

नई दिल्ली: चीनी राजदूत जू फेइहोंग ने भारत और चीन के बीच बढ़ते रिश्तों को एक "सुधार के नए स्तर" (New Level of Improvement) के रूप में परिभाषित किया है। हाल ही में बीजिंग और नई दिल्ली के बीच उच्च स्तरीय बैठकों और बढ़ते व्यापारिक आंकड़ों ने दोनों देशों के बीच सहयोग की नई उम्मीदें जगाई हैं।

ऐतिहासिक व्यापारिक आंकड़े (USD 155.6 बिलियन)

राजदूत जू फेइहोंग के अनुसार, साल 2025 भारत और चीन के व्यापारिक रिश्तों के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 155.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12% से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। विशेष रूप से, चीन को होने वाले भारतीय निर्यात में 9.7% की बढ़ोत्तरी देखी गई है, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक तालमेल को मजबूत करता है।

'रिसेट' से 'सुधार' तक का सफर

राजदूत ने उल्लेख किया कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकातों के बाद, दोनों देशों के संबंधों ने "रिसेट" मोड से बाहर निकलकर वास्तविक सुधार की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीमा विवाद जैसे मुद्दों को द्विपक्षीय संबंधों की पूरी तस्वीर को परिभाषित नहीं करने देना चाहिए।

सांस्कृतिक और जन-संपर्क की बहाली

भारत-चीन संबंधों में सुधार केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। जू फेइहोंग ने रेखांकित किया कि:

  • कैलाश मानसरोवर यात्रा: भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा फिर से शुरू कर दी गई है।

  • सीधी उड़ानें और वीजा: दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों को फिर से शुरू करने पर चर्चा जारी है और चीन ने बड़ी संख्या में भारतीयों को वीजा जारी किए हैं।

  • सांस्कृतिक समानता: चीनी राजदूत ने "वसुधैव कुटुंबकम" और चीन की "विश्व सद्भाव" की धारणा के बीच समानता बताई।

आत्मनिर्भर भारत और चीनी विकास

राजदूत ने भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' रणनीति और चीन की स्वावलंबन पर केंद्रित आर्थिक नीतियों के बीच तालमेल की बात कही। उन्होंने कहा कि चीन, भारत के ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता का समर्थन करता है और "ग्लोबल साउथ" के हितों के लिए मिलकर काम करने को तैयार है।