कठुआ मनरेगा घोटाला: हाजिरी के लिए मासूम बच्चों के चेहरों का इस्तेमाल, सरकारी धन की लूट का सनसनीखेज खुलासा

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में मनरेगा घोटाला! हाजिरी लगाने के लिए मासूम बच्चों के चेहरों का किया गया इस्तेमाल। सरकारी पैसे की लूट का अनोखा तरीका उजागर। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

कठुआ (जम्मू-कश्मीर): केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले से भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासन की सतर्कता और सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के तहत चल रहे कार्यों में फर्जीवाड़ा करने के लिए मासूम बच्चों का सहारा लिया गया।

क्या है पूरा मामला?

कठुआ की एक पंचायत में मनरेगा कार्यों की निगरानी के दौरान यह पाया गया कि 'मस्ट रोल' (हाजिरी) भरने के लिए उन बच्चों के चेहरों की फोटो अपलोड की गई, जो स्कूल जाने की उम्र के हैं। नियमों के मुताबिक, मनरेगा के तहत केवल 18 वर्ष से अधिक आयु के पंजीकृत श्रमिक ही काम कर सकते हैं, लेकिन यहाँ तकनीकी खामियों और मिलीभगत का फायदा उठाकर बच्चों को श्रमिक के रूप में दिखाया गया।

तकनीक का गलत इस्तेमाल (NMMS App)

सरकार ने मनरेगा में पारदर्शिता लाने के लिए National Mobile Monitoring System (NMMS) ऐप अनिवार्य किया है, जहाँ कार्यस्थल पर श्रमिकों की लाइव फोटो अपलोड करनी होती है। कठुआ के इस मामले में:

  • बिचौलियों और पंचायत प्रतिनिधियों ने कथित तौर पर असली श्रमिकों की जगह बच्चों को खड़ा कर उनकी फोटो ली।

  • ऐप पर इन बच्चों की हाजिरी लगाकर सरकारी बजट से पैसा निकाला गया।

  • कई मामलों में तो एक ही बच्चे की फोटो का इस्तेमाल अलग-अलग दिनों की हाजिरी के लिए किया गया।

ग्रामीणों ने खोली पोल

स्थानीय निवासियों और जागरूक नागरिकों ने जब ऑनलाइन पोर्टल पर हाजिरी चेक की, तब उन्हें इस बड़े फर्जीवाड़े का पता चला। ग्रामीणों का आरोप है कि असली मजदूर काम की तलाश में भटक रहे हैं, जबकि कुछ रसूखदार लोग फर्जी हाजिरी लगाकर सरकारी खजाने को चूना लगा रहे हैं।

"यह गरीबों के हक पर डाका है। बच्चों के चेहरे इस्तेमाल करना न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि नैतिक रूप से भी बेहद शर्मनाक है।" — स्थानीय निवासी

प्रशासन की कार्रवाई

मामले के तूल पकड़ते ही जिला प्रशासन और ग्रामीण विकास विभाग (RDD) हरकत में आ गया है।

  1. जांच के आदेश: जिला विकास आयुक्त (DDC) ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं।

  2. अधिकारियों पर गाज: संबंधित ग्राम रोजगार सेवक (GRS) और अन्य फील्ड स्टाफ की भूमिका की जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने पर निलंबन और FIR दर्ज करने की चेतावनी दी गई है।

  3. रिकवरी की तैयारी: फर्जी तरीके से निकाले गए पैसे की रिकवरी करने और उन जॉब कार्ड्स को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मनरेगा में भ्रष्टाचार: एक बड़ी चुनौती

कठुआ की यह घटना कोई इकलौती मिसाल नहीं है। देशभर में मनरेगा में मशीनों का इस्तेमाल, मृत लोगों के नाम पर पैसे निकालना और अब बच्चों के चेहरों का इस्तेमाल करना—यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के नए-नए तरीके ईजाद किए जा रहे हैं। डिजिटल हाजिरी के बावजूद इस तरह का घोटाला होना सिस्टम की सुरक्षा में सेंध के समान है।

कठुआ का 'चाइल्ड फेस अटेंडेंस' घोटाला यह याद दिलाता है कि केवल तकनीक के भरोसे भ्रष्टाचार नहीं रुक सकता; इसके लिए ज़मीनी स्तर पर कड़े ऑडिट और जवाबदेही की आवश्यकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन दोषियों के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई करता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।