होर्मुज की खाड़ी बंद: भारत में क्यों मची रसोई गैस (LPG) की किल्लत, जबकि पेट्रोल-डीजल अब भी सुरक्षित?
होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) बंद होने से भारत में LPG का संकट गहराया है। जानिए क्यों पेट्रोल-डीजल की सप्लाई अब भी सामान्य है और सरकार इस ऊर्जा संकट से कैसे निपट रही है।
होर्मुज की खाड़ी बंद: भारत में क्यों मची रसोई गैस (LPG) की किल्लत, जबकि पेट्रोल-डीजल अब भी सुरक्षित?
मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव और होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) के बंद होने ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।
आखिर ऐसा क्यों है? क्या कारण है कि संकट सिर्फ हमारी रसोई तक पहुँचा है, हमारी गाड़ियों के टैंक तक नहीं? आइए विस्तार से समझते हैं।
1. होर्मुज की खाड़ी: दुनिया की 'तेल की नस'
होर्मुज की खाड़ी दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'एनर्जी चोकपॉइंट' है। वैश्विक तेल और गैस व्यापार का लगभग 20% हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है।
2. LPG संकट की असली वजह: भारी निर्भरता
भारत में LPG की स्थिति पेट्रोल-डीजल से बिल्कुल अलग है:
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आयात पर निर्भरता: भारत अपनी LPG जरूरत का लगभग 60% से अधिक हिस्सा आयात करता है।
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सप्लाई रूट: भारत के कुल LPG आयात का करीब 85-90% हिस्सा होर्मुज की खाड़ी से होकर आता है।
जब यह रास्ता बंद हुआ, तो कतर और सऊदी अरब जैसे देशों से आने वाले LPG टैंकर बीच में ही फंस गए। -
सीमित भंडारण (Storage): भारत के पास कच्चे तेल (Crude Oil) को जमा करने के लिए तो बड़े भूमिगत भंडार हैं, लेकिन LPG को स्टोर करने की क्षमता काफी कम है।
विशाखापत्तनम और मंगलुरु जैसे केंद्रों पर मौजूद LPG स्टोरेज केवल 2-3 दिन की राष्ट्रीय खपत ही पूरी कर सकते हैं। यही वजह है कि सप्लाई में थोड़ी भी देरी होते ही बाजारों में किल्लत दिखने लगती है।
3. पेट्रोल और डीजल क्यों हैं सुरक्षित?
पेट्रोल और डीजल की सप्लाई सामान्य रहने के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
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आयात का विविधीकरण (Diversification): पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, भारत अब लगभग 40 देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है।
वर्तमान में भारत का 70% कच्चा तेल उन रास्तों से आ रहा है जिनका होर्मुज की खाड़ी से कोई लेना-देना नहीं है (जैसे रूस, अमेरिका और अफ्रीका)। -
स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR): भारत के पास विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में विशाल भूमिगत गुफाएं हैं, जहाँ करोड़ों बैरल कच्चा तेल जमा है। यह रिजर्व संकट के समय देश को कई हफ्तों तक सप्लाई दे सकता है।
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रिफाइनिंग क्षमता: भारत के पास अपनी जरूरत से ज्यादा रिफाइनिंग क्षमता है। हम कच्चा तेल मंगाकर खुद पेट्रोल-डीजल तैयार करते हैं, जबकि LPG को अक्सर सीधे तरल रूप में आयात करना पड़ता है।
सरकार के कदम और भविष्य की राह
सप्लाई को सुचारू बनाने के लिए सरकार ने कई आपातकालीन कदम उठाए हैं:
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उत्पादन में वृद्धि: रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया है कि वे अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पादों के बजाय LPG (प्रोपेन और ब्यूटेन) का उत्पादन 28% तक बढ़ाएं।
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नए विकल्प: भारत अब अमेरिका, अल्जीरिया और नॉर्वे जैसे देशों से LPG के नए जहाजों के लिए करार कर रहा है।
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होर्डिंग पर लगाम: घरेलू सिलेंडर की कालाबाजारी रोकने के लिए बुकिंग के बीच 25 दिन का अनिवार्य अंतराल (Gap) लागू किया गया है।
होर्मुज का संकट हमें यह सिखाता है कि ऊर्जा के लिए किसी एक रास्ते या क्षेत्र पर निर्भर रहना जोखिम भरा है। हालांकि पेट्रोल-डीजल फिलहाल सुरक्षित हैं, लेकिन LPG की स्थिति संवेदनशील है। उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि वे पैनिक बुकिंग न करें, क्योंकि सरकार वैकल्पिक रास्तों से आपूर्ति बहाल करने में जुटी है।





