इनकम टैक्स विभाग का बड़ा अपडेट: क्या आपको भी मिला है 'SFT' ट्रांजैक्शन का ईमेल? जानें विभाग ने क्यों कहा- इसे इग्नोर करें!
आयकर विभाग ने उन करदाताओं के लिए स्पष्टीकरण जारी किया है जिन्हें 'Significant Transactions' के गलत ईमेल मिले हैं। जानें क्यों विभाग ने इसे तकनीकी गलती बताया और आपको अब क्या करना चाहिए।
इनकम टैक्स विभाग का बड़ा स्पष्टीकरण: गलत 'Significant Transactions' ईमेल से न
घबराएं, विभाग ने दी इग्नोर करने की सलाह
नई दिल्ली | मार्च 2026
पिछले कुछ दिनों से देश भर के लाखों करदाताओं (Taxpayers) के बीच उस समय हड़कंप मच गया जब उनके इनबॉक्स में आयकर विभाग की ओर से 'Significant Transactions' (महत्वपूर्ण लेनदेन) के ईमेल आने लगे। कई करदाताओं को लगा कि शायद उनके पुराने लेनदेन में कोई बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई है या विभाग उन्हें नोटिस भेजने की तैयारी में है।
लेकिन अब, आयकर विभाग (Income Tax Department) ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर करोड़ों करदाताओं को बड़ी राहत दी है।
1. क्या है पूरा मामला?
दरअसल, आयकर विभाग के एआईएस (Annual Information Statement) मॉड्यूल के तहत कई करदाताओं को ऐसे ईमेल प्राप्त हुए जिनमें उनके वित्तीय वर्ष के दौरान किए गए "महत्वपूर्ण लेनदेन" (Significant Financial Transactions - SFT) का विवरण था। समस्या तब शुरू हुई जब उन लोगों को भी ये ईमेल मिले जिन्होंने ऐसा कोई लेनदेन किया ही नहीं था।
2. विभाग ने क्या कहा? (The Clarification)
सोशल मीडिया और ईमेल के माध्यम से बढ़ती शिकायतों को देखते हुए आयकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि:
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तकनीकी खामी: ये ईमेल एक तकनीकी खराबी (Technical Glitch) के कारण सिस्टम द्वारा अपने आप जेनरेट हो गए थे।
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इग्नोर करें: विभाग ने करदाताओं को सलाह दी है कि यदि उनके द्वारा कोई ऐसा बड़ा लेनदेन नहीं किया गया है, तो वे इन ईमेल्स को पूरी तरह से नजरअंदाज (Ignore) कर सकते हैं।
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डरने की जरूरत नहीं: यह कोई कानूनी नोटिस या आयकर विभाग की जांच का हिस्सा नहीं है।
3. SFT ईमेल क्या होता है?
आयकर विभाग बैंकों, म्यूचुअल फंड्स और रजिस्ट्रार जैसे संस्थानों से आपके बड़े लेनदेन का डेटा इकट्ठा करता है। जब आपका लेनदेन एक निश्चित सीमा से अधिक होता है, तो विभाग आपको सूचित करता है ताकि आप अपनी ITR (Income Tax Return) में उसे सही तरीके से दिखा सकें।
4. अगर आपको भी ऐसा ईमेल मिला है, तो क्या करें?
विभाग की सलाह के बावजूद, एक जागरूक नागरिक के तौर पर आपको ये कदम उठाने चाहिए:
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AIS पोर्टल चेक करें: अपने ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करें और 'Annual Information Statement' (AIS) देखें। यदि वहां कोई गलत जानकारी दिख रही है, तो आप 'Feedback' विकल्प का उपयोग करके उसे अस्वीकार (Deny) कर सकते हैं।
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बैंक स्टेटमेंट का मिलान करें: ईमेल में बताए गए लेनदेन को अपने बैंक स्टेटमेंट से मिला लें।
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घबराएं नहीं: जैसा कि विभाग ने कहा है, यह एक तकनीकी त्रुटि है, इसलिए किसी भी बाहरी लिंक पर क्लिक न करें जो आधिकारिक 'incometax.gov.in' डोमेन से न हो।
डिजिटल इंडिया के इस दौर में तकनीकी गलतियां होना संभव है। आयकर विभाग का समय पर आया यह स्पष्टीकरण लाखों करदाताओं के तनाव को कम करने वाला है। यदि आपको ऐसा कोई ईमेल मिला है जो आपके वास्तविक लेनदेन से मेल नहीं खाता, तो बेफिक्र रहें और विभाग के निर्देशानुसार उसे इग्नोर करें।





