विकास से कोसों दूर दरभंगा का भरडीहा गांव:स्कूल को भवन नहीं, नदी पार करने के लिए पुल नहीं; ग्रामीणों ने लिया निर्णय...नहीं करेंगे मतदान
दरभंगा जिला के समस्तीपुर लोकसभा के कुशेश्वर स्थान विधानसभा में एक गांव ऐसा भी जहां आजादी के बाद से अब तक एक विद्यालय भवन नहीं बन सका हैं।चुनाव के दौरान कई जनप्रतिनिधि आये, आश्वासन दिये लेकिन यह सपना ही रह गया। इस कारण तपती धूप और बारिश में खुले आसमान के नीचे बच्चे पढ़ने के लिये विवश है। दशकों बाद एक गांव ऐसा भी हम बात कर रहैं है कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड मुख्यालय से सटे केवटगामा पंचायत के भरडीहा गांव का। इस गांव की आबादी करीब लगभग पांच हजार हैं लेकिन यहां के लोग आजादी के बाद से अब तक सिर्फ समस्याओं को ही झेल रहें हैं। इसमें एक बड़ी समस्या गांव में विद्यालय भवन का होना नहीं है। खुले आसमान के नीचे इस चिलचिलाती धूप में बच्चे पढ़ने जाते है। ग्रामीण एवं शिक्षक के सहयोग से एक झोपड़ी का विद्यालय बनाया गया। विद्यालय भवन के निर्माण को लेकर कई बार प्रधानाध्यापक द्वारा विभाग को पत्र लिखा गया। साथ ही ग्रामीणों ने भी सामूहिक आवेदन दिया, पर विभाग इस तरह सोया हुआ है। ग्रामीणों का कहना हैं कि ऐसे में सरकार के द्वारा विकास की बात करना पूरी तरह से बेईमानी हैं। चार शिक्षकों के माथे पर 203 छात्र प्राथमिक विद्यालय भरडीहा में कुल 203 छात्र नामांकित है और चार शिक्षक इस विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने के लिए कार्यरत है। लेकिन विद्यालय का अपना कोई भवन ही नहीं है। जानकर बताते है कि दर्जनों बार प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से लेकर जिला मुख्यालय तक पत्र लिखा गया। इसके बावजूद आज तक भवन नहीं बन पाया है। स्थानीय ग्रामीण के अनुसार जब तक मौसम ठंडा रहता है तब तक बच्चे विद्यालय में रहते है जैसे ही धूप बढ़ती है बच्चे विद्यालय छोड़कर चले जाते है। क्योंकि जो झोपड़ी बनी है उसमें मिड डे मील बनता है तो छात्र कहां बैठकर पढ़गे। विकास की बात करना बेईमानी ग्रामीण बताते है कि तत्कालीन सांसद प्रिंस राज से लेकर शिक्षा विभाग के सभी अधिकारियों को पत्र के माध्यम से विद्यालय भवन को लेकर अवगत कराया गया। कोई भी यहां की समस्याओं को समझने के लिए तैयार नहीं है। आज भी हमारे गांव के बच्चे धूप में बैठकर पढ़ते है। जिस सुशासन के राज में विद्यालय का भवन ही ना हो और छात्र बोरा बिछाकर धूप में बैठकर पढ़ रहा हो उस राज्य में विकास का दावा करने वाली सरकार की मंशा को समझा जा सकता है। वोट का करेंगे बहिष्कार बता दें कि यहां सिर्फ विद्यालय का भवन नही होना ही समस्या नही है। इस गांव की पांच हजार आबादी कई समस्याओं को झेल रही है। अब इस गांव के लोग वोट बहिष्कार करने की बात कर रहे है। आजादी के कई वर्ष बीत जाने के बाद भी कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड का भरडीहा गांव आज भी विकास से कोसों दूर हैं। यह इस गांव कि विडंबना हैं कि चुनाव के दौरान वोट मांगने आयें नेताजी तरह तरह के शब्ज़बाग दिखाकर वोट लेते रहें लेकिन इस गांव को फिर कभी मुड़कर नहीं देख पाये। गांव के नदी में बने बांस के चचरी पुल पर पैदल पार कर वोट देने जाते है यहां के लोग, पर इस बार भरडीहा की पांच हजार आबादी के लोंगों ने एक स्वर में कहा कि पुल नहीं तो वोट नहीं। आजादी के बाद इस गांव मे एक विद्यालय भवन नहीं बन पाया ठीक उसी तरह आजादी के बाद से आज तक गांव से सटे नदी में पुल नहीं बन पाया। जिससे यहां के ग्रामीणों में सरकार एवं सरकार के अधिकारियों के प्रति नाराजगी तो हैं ही आक्रोश भी उतना ही । गांव को लगा हैं राजनीति श्राप स्थानीय जानकर बताते है कि इस गांव को मानो राजनीति श्राप लगा हुआ है। यहां जितने भी सरकार के प्रतिनिधि बने है सब के सब स्थानीय रहे है। इसके बावजूद इस गांव में एक पुल का भी निर्माण नहीं हो सका। इस गांव के लोग एक पुल के लिए आला अधिकारी और जनप्रतिनिधियों का चक्कर लगा लगा कर थक चुके है, पर इस गांव की समस्या को निपटाने के लिए किसी ने भी पहल नहीं की है। नदी पार कर लोग करने जाते हैं वोट बता दें कि विगत पांच वर्ष पूर्व इस गांव के लोग नाव से नदी पार कर प्राथमिक विद्यालय फकदौलिया में वोट करने जाते थे। इसके बाद गांव के लोगो ने इसका उपाय निकाला और गांव में चंदा कर लगभग 80 हजार की लागत से उस नदी में बांस के चचरी पुल का निर्माण किया। तब से प्रत्येक वर्ष इस गांव के लोग नदी में बांस का चचरी पुल का निर्माण करते आ रहे है। स्थानीय लोग का कहना है कि जब सारा समस्या हम गांव के लोग खुद से ही निपटा लेंगे तो सरकार चुनने की जरूरत ही क्या है। इसलिए गांव के लोगों ने इस बार वोट नहीं देने का फैसला किया है।
दरभंगा जिला के समस्तीपुर लोकसभा के कुशेश्वर स्थान विधानसभा में एक गांव ऐसा भी जहां आजादी के बाद से अब तक एक विद्यालय भवन नहीं बन सका हैं।चुनाव के दौरान कई जनप्रतिनिधि आये, आश्वासन दिये लेकिन यह सपना ही रह गया। इस कारण तपती धूप और बारिश में खुले आसमान के नीचे बच्चे पढ़ने के लिये विवश है।
दशकों बाद एक गांव ऐसा भी
हम बात कर रहैं है कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड मुख्यालय से सटे केवटगामा पंचायत के भरडीहा गांव का। इस गांव की आबादी करीब लगभग पांच हजार है लेकिन यहां के लोग आजादी के बाद से अब तक सिर्फ समस्याओं को ही झेल रहें हैं। इसमें एक बड़ी समस्या गांव में विद्यालय भवन का नहीं होना है। खुले आसमान के नीचे इस चिलचिलाती धूप में बच्चे पढ़ने जाते है।ग्रामीण एवं शिक्षक के सहयोग से एक झोपड़ी का विद्यालय बनाया गया। विद्यालय भवन के निर्माण को लेकर कई बार प्रधानाध्यापक द्वारा विभाग को पत्र लिखा गया। साथ ही ग्रामीणों ने भी सामूहिक आवेदन दिया, पर विभाग सोया हुआ है। ग्रामीणों का कहना हैं कि ऐसे में सरकार के द्वारा विकास की बात करना पूरी तरह से बेईमानी है।
चार शिक्षकों के माथे पर 203 छात्र
प्राथमिक विद्यालय भरडीहा में कुल 203 छात्र नामांकित है और चार शिक्षक इस विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने के लिए कार्यरत है। लेकिन विद्यालय का अपना कोई भवन ही नहीं है।
जानकर बताते है कि दर्जनों बार प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से लेकर जिला मुख्यालय तक पत्र लिखा गया। इसके बावजूद आज तक भवन नहीं बन पाया है। स्थानीय ग्रामीण के अनुसार जब तक मौसम ठंडा रहता है तब तक बच्चे विद्यालय में रहते है जैसे ही धूप बढ़ती है बच्चे विद्यालय छोड़कर चले जाते है। क्योंकि जो झोपड़ी बनी है उसमें मिड डे मील बनता है तो छात्र कहां बैठकर पढ़गे।
विकास की बात करना बेईमानी
ग्रामीण बताते है कि तत्कालीन सांसद प्रिंस राज से लेकर शिक्षा विभाग के सभी अधिकारियों को पत्र के माध्यम से विद्यालय भवन को लेकर अवगत कराया गया। कोई भी यहां की समस्याओं को समझने के लिए तैयार नहीं है। आज भी हमारे गांव के बच्चे धूप में बैठकर पढ़ते है। जिस सुशासन के राज में विद्यालय का भवन ही ना हो और छात्र बोरा बिछाकर धूप में बैठकर पढ़ रहा हो उस राज्य में विकास का दावा करने वाली सरकार की मंशा को समझा जा सकता है।
वोट का करेंगे बहिष्कार
बता दें कि यहां सिर्फ विद्यालय का भवन नही होना ही समस्या नही है। इस गांव की पांच हजार आबादी कई समस्याओं को झेल रही है। अब इस गांव के लोग वोट बहिष्कार करने की बात कर रहे है।आजादी के कई वर्ष बीत जाने के बाद भी कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड का भरडीहा गांव आज भी विकास से कोसों दूर हैं। यह इस गांव कि विडंबना है कि चुनाव के दौरान वोट मांगने आये नेताजी तरह-तरह के सपने दिखाकर वोट लेते रहें लेकिन इस गांव को फिर कभी मुड़कर नहीं देखा।
यहां के लोग गांव के नदी में बने बांस के चचरी पुल पर पैदल पार कर वोट देने जाते है। लेकिन इस बार भरडीहा की पांच हजार आबादी के लोंगों ने एक स्वर में कहा कि पुल नहीं तो वोट नहीं। आजादी के बाद इस गांव मे एक विद्यालय भवन नहीं बन पाया ठीक उसी तरह आजादी के बाद से आज तक गांव से सटे नदी में पुल नहीं बन पाया। जिससे यहां के ग्रामीणों में सरकार एवं सरकार के अधिकारियों के प्रति नाराजगी तो हैं ही आक्रोश भी उतना ही ।
गांव को लगा हैं राजनीति श्राप
स्थानीय जानकर बताते है कि इस गांव को राजनीति श्राप लगा हुआ है। यहां जितने भी सरकार के प्रतिनिधि बने है सब के सब स्थानीय रहे है। इसके बावजूद इस गांव में एक पुल का भी निर्माण नहीं हो सका। इस गांव के लोग एक पुल के लिए आला अधिकारी और जनप्रतिनिधियों का चक्कर लगा लगा कर थक चुके है, पर इस गांव की समस्या को निपटाने के लिए किसी ने भी पहल नहीं की है।
नदी पार कर लोग करने जाते हैं वोट
बता दें कि विगत पांच वर्ष पूर्व इस गांव के लोग नाव से नदी पार कर प्राथमिक विद्यालय फकदौलिया में वोट करने जाते थे। इसके बाद गांव के लोगों ने इसका उपाय निकाला और गांव में चंदा जमा कर लगभग 80 हजार की लागत से उस नदी में बांस का चचरी पुल का निर्माण किया। तब से प्रत्येक वर्ष इस गांव के लोग नदी में बांस का चचरी पुल का निर्माण करते आ रहे है। स्थानीय लोग का कहना है कि जब सारी समस्या हम गांव के लोग खुद से ही निपटा लेंगे तो सरकार चुनने की जरूरत ही क्या है..इसलिए गांव के लोगों ने इस बार वोट नहीं देने का फैसला किया है।
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