मणिपुर में फिर भड़की हिंसा: कांगपोकपी में उग्रवादियों का तांडव, 3 ग्रामीणों की मौत, कई घर फूंके
मणिपुर के कांगपोकपी जिले में एक बार फिर जातीय हिंसा भड़क उठी है। उग्रवादियों के हमले में 3 ग्रामीणों की मौत हो गई और 7 घरों को आग के हवाले कर दिया गया। जानिए जमीनी हालात।
मणिपुर में फिर खूनी संघर्ष: कांगपोकपी में सोते हुए ग्रामीणों पर अंधाधुंध फायरिंग, 3 की मौत, सुलग उठा इलाका
इम्फाल/कांगपोकपी (समाचार डेस्क - 5 जून, 2026): पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में शांति बहाली की तमाम कोशिशों के बीच एक बार फिर हिंसा की दर्दनाक आग भड़क उठी है। राज्य के पहाड़ी जिले कांगपोकपी (Kangpokpi) के सीमावर्ती गांव में तड़के सुबह हुए एक कायराना उग्रवादी हमले में तीन स्थानीय ग्रामीणों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस हमले के दौरान उग्रवादियों ने गांव के कम से कम 7 घरों को पूरी तरह से आग के हवाले कर दिया, जिससे इलाके में एक बार फिर भारी तनाव पैदा हो गया है।
सुरक्षा बलों से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह घटना आज तड़के करीब 4:30 बजे की है, जब भारी हथियारों से लैस उग्रवादियों के एक समूह ने घाटी और पहाड़ी क्षेत्र के सीमावर्ती गांव पर अचानक धावा बोल दिया।
1. हमले की इनसाइड स्टोरी: क्या हुआ उस सुबह?
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, हमला बेहद सुनियोजित था:
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अंधाधुंध गोलीबारी: उग्रवादियों ने गांव को तीन तरफ से घेरकर अत्याधुनिक स्वचालित हथियारों (Automatic Weapons) से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई इस गोलीबारी से ग्रामीणों को संभलने का मौका नहीं मिला।
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अग्निकांड: गोलीबारी के तुरंत बाद हमलावरों ने घरों पर पेट्रोल बम फेंके। इस आगजनी में 7 पारंपरिक घर पूरी तरह जलकर खाक हो गए और लाखों की संपत्ति का नुकसान हुआ है।
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हताहतों की संख्या: हमले में तीन पुरुषों की मौके पर ही मौत हो गई, जो गांव की सुरक्षा के लिए रात को पहरा दे रहे थे। इसके अलावा दो अन्य ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हैं, जिन्हें इंफाल के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
2. सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई और सर्च ऑपरेशन
घटना की सूचना मिलते ही भारतीय सेना, असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस की संयुक्त टुकड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं।
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इलाके की घेराबंदी: सुरक्षा बलों ने पूरे कांगपोकपी और उससे सटे घाटी के इलाकों की सीमाओं को सील कर दिया है।
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कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी: घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में छिपे हमलावरों को पकड़ने के लिए ड्रोन और खोजी कुत्तों की मदद से एक बड़ा सर्च ऑपरेशन (Combing Operation) चलाया जा रहा है।
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अतिरिक्त बल तैनात: अफवाहों को फैलने से रोकने और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों को फ्लैग मार्च करने के निर्देश दिए गए हैं।
3. जातीय तनाव की पृष्ठभूमि और मौजूदा स्थिति
मणिपुर पिछले तीन सालों से अधिक समय से समय-समय पर होने वाले जातीय संघर्षों (Ethnic Clashes) की मार झेल रहा है। शांति समितियों और केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद कुछ महीनों से स्थिति शांत थी, लेकिन इस ताजा घटना ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पार से हथियारों की अवैध तस्करी और दोनों समुदायों के बीच अविश्वास की खाई को पूरी तरह न पाट पाना ही इस तरह की छिटपुट हिंसा की मुख्य वजह है। स्थानीय नागरिक समाज संगठनों (CSOs) ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
निष्कर्ष: शांति की राह में बड़ा रोड़ा
कांगपोकपी की इस घटना ने साफ कर दिया है कि मणिपुर में पूरी तरह से शांति बहाल करने के लिए अभी जमीनी स्तर पर और कड़े कदम उठाने की जरूरत है। सरकार और स्थानीय प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस समय आम नागरिकों के भीतर सुरक्षा की भावना को दोबारा जगाना और प्रतिशोध (Retaliation) की किसी भी संभावित लहर को रोकना है।





