मणिपुर की पहाड़ियों में फिर गूंजी गोलियां: उखरूल में ताजा फायरिंग से दहशत, सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर!
मणिपुर के उखरूल (Ukhrul) जिले के लिटन इलाके में ताजा गोलीबारी ने तनाव बढ़ा दिया है। कुकी और तांगखुल नागा समुदायों के बीच बढ़ती खींचतान और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।
इम्फाल/उखरूल: मणिपुर का पहाड़ी जिला उखरूल (Ukhrul) एक बार फिर हिंसा की चपेट में है।
ताजा घटनाक्रम: क्या हुआ उखरूल में?
रिपोर्ट्स के अनुसार, 27 मार्च 2026 की देर रात उखरूल के लिटन-सोरईखोंग (Litan-Sareikhong) बेल्ट में अज्ञात हथियारबंद उपद्रवियों द्वारा अंधाधुंध फायरिंग की गई।
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15 राउंड ऑटोमैटिक फायरिंग: कुकी नागरिक समाज संगठन (Kuki CSO) के अनुसार, लगभग 10:10 बजे न्यू हेवन की दिशा से चेपु योलेन (Chepu Yaolen) की ओर गोलियां चलाई गईं।
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समुदायों के बीच आरोप-प्रत्यारोप: जहाँ तांगखुल नागा संगठनों (TNFO) ने कुकी उग्रवादियों पर सोओ (SoO) समझौते का उल्लंघन कर हमला करने का आरोप लगाया है, वहीं कुकी समूहों का दावा है कि उनके शांतिपूर्ण गांवों को निशाना बनाया गया है।
मौत के साये में ग्रामीण: खेती-बाड़ी और स्कूल ठप
इस ताजा हिंसा का सबसे बुरा असर आम नागरिकों पर पड़ा है। उखरूल और पड़ोसी कामजोंग जिले के सीमावर्ती गांवों में स्थिति बेहद नाजुक है:
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घायल नागरिक: पिछले कुछ दिनों में हुई झड़पों में कम से कम 3 से 5 लोग घायल हुए हैं, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं।
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खेती बंद: फायरिंग के डर से किसानों ने खेतों में जाना बंद कर दिया है, जिससे आने वाले समय में खाद्य संकट का खतरा बढ़ गया है।
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स्कूलों पर ताले: शार्कफंग और मोंगकोट चेपु जैसे गांवों में डर के मारे स्कूल बंद कर दिए गए हैं।
सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई: बंकरों को किया गया ध्वस्त
बढ़ते तनाव को देखते हुए भारतीय सेना, असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस ने एक बड़ा संयुक्त अभियान (Joint Operation) चलाया है।
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अवैध बंकर नष्ट: सुरक्षा बलों ने संवेदनशील पहाड़ियों पर बने कई अवैध बंकरों को ध्वस्त कर दिया है, जिनका इस्तेमाल फायरिंग के लिए किया जा रहा था।
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एरिया डोमिनेशन: संवेदनशील रास्तों और नेशनल हाईवे-202 (NH-202) पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि आम लोगों की आवाजाही सुरक्षित रहे।
तनाव की जड़: फरवरी से सुलग रही है आग
उखरूल में तनाव की शुरुआत फरवरी 2026 में एक मामूली आपसी विवाद से हुई थी, जिसने देखते ही देखते बड़े सांप्रदायिक संघर्ष का रूप ले लिया। तब से अब तक दोनों समुदायों के 30 से अधिक घरों को आग के हवाले किया जा चुका है।
शांति की अपील
मणिपुर की पहाड़ियों में शांति का माहौल तभी लौट सकता है जब दोनों समुदाय बातचीत की मेज पर आएं। सरकार और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अफवाहों और बार-बार होने वाली फायरिंग ने विश्वास की खाई को और गहरा कर दिया है।





