बिहार राज्यसभा चुनाव 2026: क्या ओवैसी बिगाड़ेंगे तेजस्वी का खेल? RJD के सामने 'सीट' बचाने की बड़ी चुनौती!
बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 में 5 सीटों का गणित उलझ गया है। जानिए कैसे ओवैसी की AIMIM और एनडीए के रणनीतिक दांव ने तेजस्वी यादव की RJD के लिए राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है।
पटना | 25 फरवरी, 2026 बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। चुनाव आयोग की घोषणा के अनुसार, 16 मार्च 2026 को मतदान होना है। जहाँ सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) क्लीन स्वीप की तैयारी में है, वहीं लालू प्रसाद यादव की आरजेडी (RJD) के लिए अपनी मौजूदा सीटें बचाना एक 'अग्निपरीक्षा' साबित हो रहा है।
5वीं सीट का फंसा पेंच: क्या है गणित?
बिहार विधानसभा के मौजूदा संख्या बल के हिसाब से एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए कम से कम 41 वोटों की आवश्यकता है।
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एनडीए की स्थिति: 202 विधायकों के साथ एनडीए 4 सीटें आसानी से जीत रहा है। 5वीं सीट के लिए उन्हें मात्र 3 और वोटों की जरूरत है।
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महाठबंधन की चुनौती: आरजेडी नीत महागठबंधन के पास कुल 35 विधायक (आरजेडी 25, कांग्रेस 6, वामदल 4) हैं। उन्हें एक सीट जीतने के लिए भी 6 अतिरिक्त वोटों की दरकार है।
असदुद्दीन ओवैसी का 'मास्टरस्ट्रोक'
यहाँ AIMIM (5 विधायक) और बसपा (1 विधायक) निर्णायक भूमिका में हैं। ओवैसी की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने साफ कर दिया है कि वे "एकतरफा समर्थन" नहीं देंगे।
AIMIM की शर्तें: ओवैसी की पार्टी ने मांग रखी है कि विपक्षी दल उनके उम्मीदवार का समर्थन करें। AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन ने तो यहाँ तक कह दिया कि अगर तेजस्वी यादव समर्थन चाहते हैं, तो उन्हें हैदराबाद आकर बात करनी होगी। यह आरजेडी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका है क्योंकि ओवैसी अब "Slave" (गुलाम) नहीं, बल्कि "Equal" (बराबरी) का दर्जा मांग रहे हैं।
RJD के इन दिग्गजों की सीट खतरे में
राज्यसभा से प्रेमचंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह (दोनों RJD) का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है। संख्या बल की कमी के कारण आरजेडी के लिए इन दोनों सीटों को बरकरार रखना लगभग असंभव लग रहा है, जब तक कि ओवैसी या एनडीए के नाराज विधायक उनका साथ न दें।
NDA की रणनीति: कौन जाएगा दिल्ली?
इधर एनडीए खेमे में नितिन नबीन (भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष) और रामनाथ ठाकुर (JDU) जैसे नामों की चर्चा है। भाजपा किसी ओबीसी या ईबीसी चेहरे को उतारकर 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले सोशल इंजीनियरिंग का बड़ा संदेश देना चाहती है।





