भारत का 'बाहुबली' फैसला: 114 राफेल जेट समेत 3.6 लाख करोड़ के रक्षा सौदों को मंजूरी, चीन-पाकिस्तान की बढ़ेगी टेंशन
भारत ने 114 राफेल जेट समेत 3.6 लाख करोड़ रुपये के रक्षा सौदों को मंजूरी दी है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने वायुसेना और नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए इस ऐतिहासिक कदम को हरी झंडी दिखाई। जानें पूरी डिटेल।
नई दिल्ली: भारतीय रक्षा क्षेत्र के इतिहास में आज का दिन बेहद अहम है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council - DAC) ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए 114 राफेल फाइटर जेट्स (Rafale Jets) की खरीद को हरी झंडी दे दी है। यह फैसला भारतीय वायुसेना (IAF) की घटती स्क्वाड्रन क्षमता को देखते हुए लिया गया है।
इसके साथ ही, सरकार ने कुल 3.6 लाख करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जो भारत के सैन्य आधुनिकीकरण (Military Modernisation) की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
114 राफेल जेट्स: 'मेक इन इंडिया' को मिलेगी नई उड़ान
इस मेगा डील की सबसे बड़ी खास बात यह है कि इसे 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत अंजाम दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, 114 राफेल विमानों की खरीद प्रक्रिया (MRFA) में स्वदेशीकरण पर भारी जोर दिया गया है:
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90 विमान भारत में बनेंगे: कुल 114 में से लगभग 90 राफेल जेट्स का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इसके लिए फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन (Dassault Aviation) भारतीय निजी कंपनियों के साथ साझेदारी करेगी।
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18 विमान फ्लाई-अवे कंडीशन में: वायुसेना की तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए शुरुआती 18 विमान फ्रांस से सीधे उड़ने योग्य स्थिति (Fly-away condition) में आएंगे।
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तकनीकी हस्तांतरण (ToT): इस सौदे में बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर शामिल है, जिससे भारत में एयरोस्पेस इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी। इन विमानों में 50% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह मंजूरी फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) की आगामी भारत यात्रा (17-19 फरवरी 2026) से ठीक पहले आई है, जिससे इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों के और गहराने की उम्मीद है।
तीनों सेनाओं को मिलेगा नया कवच
DAC की बैठक में सिर्फ वायुसेना ही नहीं, बल्कि नौसेना और थल सेना के लिए भी कई अहम फैसले लिए गए:
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नौसेना के लिए P-8I विमान: हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भारतीय नौसेना को 6 अतिरिक्त बोइंग P-8I (Poseidon-8I) लंबी दूरी के समुद्री निगरानी विमान मिलेंगे। ये विमान पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare) में माहिर हैं।
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भविष्य के हथियार (AS-HAPS): DAC ने वायुसेना के लिए 'हाई एल्टिट्यूड स्यूडो सैटेलाइट' (High Altitude Pseudo Satellite) की खरीद को भी मंजूरी दी है। यह एक तरह का मानवरहित एयरशिप है जो महीनों तक आसमान में रहकर दुश्मन की निगरानी कर सकता है।
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थल सेना के लिए एंटी-टैंक माइन्स: भारतीय सेना के लिए 'विभव' (Vibhav) एंटी-टैंक माइन्स की खरीद को मंजूरी मिली है, जो दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों को रोकने में कारगर होंगी।
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टैंकों का आधुनिकीकरण: टी-72 टैंकों (T-72 Tanks) और बीएमपी-2 (BMP-II) इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स के इंजन और प्लेटफॉर्म को अपग्रेड करने के प्रस्ताव को भी पास किया गया है।
क्यों जरूरी था यह फैसला?
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह सौदा भारतीय वायुसेना के लिए 'जीवनदान' समान है। वर्तमान में वायुसेना के पास लड़ाकू विमानों के स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन के मुकाबले केवल 31 स्क्वाड्रन ही बचे हैं। पुराने मिग-21 (MiG-21) के रिटायर होने और नए विमानों की धीमी आपूर्ति ने सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी थीं। 114 नए राफेल जेट्स के आने से भारत को पाकिस्तान और चीन दोनों मोर्चों पर एक साथ निपटने में मदद मिलेगी।
आगे की प्रक्रिया
DAC द्वारा दी गई यह मंजूरी 'आवश्यकता की स्वीकृति' (Acceptance of Necessity - AoN) है, जो खरीद प्रक्रिया का पहला चरण है। अब इस प्रस्ताव को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट समिति (CCS) के पास भेजा जाएगा, जहाँ से अंतिम मुहर लगने के बाद फ्रांस के साथ औपचारिक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
इस फैसले ने साफ कर दिया है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को लेकर अब कोई समझौता करने के मूड में नहीं है।





