UGC Regulations 2026: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और UGC से मांगा जवाब, नए 'समानता नियमों' के क्रियान्वयन पर लगाई रोक

UGC Regulations 2026 विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और UGC को नोटिस जारी किया। नए नियमों पर रोक लगाते हुए कोर्ट ने इसे 'समाज को बांटने वाला' बताया। जानें क्या है पूरा मामला।

UGC Regulations 2026: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और UGC से मांगा जवाब, नए 'समानता नियमों' के क्रियान्वयन पर लगाई रोक

नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में अधिसूचित 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता का प्रचार (Promotion of Equity) विनियम, 2026' को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने इन नियमों की भाषा को "अस्पष्ट" (Vague) बताते हुए इनके दुरुपयोग की आशंका जताई है।

क्या है पूरा विवाद?

UGC ने 13 जनवरी 2026 को नए नियम लागू किए थे, जिनका उद्देश्य कैंपस में जातिगत भेदभाव को रोकना था। हालांकि, इन नियमों के रेगुलेशन 3(c) को लेकर भारी विरोध शुरू हो गया।

  • भेदभाव की संकीर्ण परिभाषा: याचिकाकर्ताओं (विनीत जिंदल, राहुल दीवान और मृत्युंजय तिवारी) का तर्क है कि नए नियमों में भेदभाव को केवल SC, ST और OBC वर्गों के खिलाफ होने वाली घटनाओं तक सीमित कर दिया गया है।

  • सामान्य वर्ग की अनदेखी: याचिका में आरोप लगाया गया कि यह परिभाषा सामान्य वर्ग (General Category) के छात्रों को संस्थागत सुरक्षा से बाहर रखती है, जो कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 (समानता और गरिमा का अधिकार) का उल्लंघन है।

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा:

"आजादी के 75 साल बाद हम एक जातिविहीन समाज बनाने की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन क्या हम अब पीछे की ओर जा रहे हैं? ये नियम समाज को बांटने की क्षमता रखते हैं।"

अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि क्या हम कॉलेजों में अलग-अलग हॉस्टल या समुदायों के आधार पर विभाजन की ओर बढ़ रहे हैं? कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालयों में एकता और समरसता का माहौल होना चाहिए, न कि पृथक्करण (Segregation) का।

कोर्ट के बड़े निर्देश:

  1. पुराने नियम रहेंगे प्रभावी: कोर्ट ने आदेश दिया है कि फिलहाल 2026 के नए नियमों को 'अबेयंस' (Abeyance) यानी स्थगित रखा जाए और 2012 के पुराने दिशा-निर्देश ही लागू रहेंगे।

  2. विशेषज्ञ समिति का सुझाव: बेंच ने सरकार को सुझाव दिया कि इन नियमों की समीक्षा के लिए कानूनी विशेषज्ञों और न्यायविदों की एक उच्च-स्तरीय कमेटी बनाई जाए।

  3. अगली सुनवाई: इस मामले की विस्तृत सुनवाई अब 19 मार्च 2026 को तय की गई है, तब तक केंद्र और UGC को अपना जवाब दाखिल करना होगा।