RBI Repo Rate: गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नहीं बदली ब्याज दरें, जानें आपके होम लोन और EMI पर क्या होगा असर
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने फरवरी 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है। जानिए आपके होम लोन की ईएमआई और निवेश पर इसका क्या असर पड़ेगा।
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी चालू वित्त वर्ष की अंतिम समीक्षा बैठक के नतीजों की घोषणा कर दी है। आरबीआई ने एक बार फिर आम जनता और बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रेपो रेट (Repo Rate) को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
रेपो रेट स्थिर रखने के मुख्य कारण
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महंगाई दर में नियंत्रण: भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई फिलहाल आरबीआई के संतोषजनक दायरे में है। दिसंबर 2025 में यह 1.33% के करीब रही, जिससे केंद्रीय बैंक को दरों में बदलाव न करने की राहत मिली।
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आर्थिक विकास (GDP Growth): आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी विकास दर का अनुमान 7.4% रखा है। मजबूत घरेलू मांग और विनिर्माण क्षेत्र में सुधार के चलते अर्थव्यवस्था सही दिशा में बढ़ रही है।
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वैश्विक प्रभाव: अमेरिका के साथ हुए हालिया व्यापार समझौतों और वैश्विक स्तर पर बदलती मौद्रिक स्थितियों को देखते हुए आरबीआई ने 'वेट एंड वॉच' (Wait and Watch) की नीति अपनाई है।
आपके होम लोन और EMI पर क्या होगा असर?
रेपो रेट में कोई बदलाव न होने का सीधा मतलब है कि फिलहाल आपकी बैंक किस्तों (EMI) में कोई बड़ी कमी या बढ़ोत्तरी नहीं होगी।
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पुराने कर्जदार: जिन लोगों ने फ्लोटिंग रेट पर होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन लिया है, उनकी ईएमआई स्थिर रहेगी।
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नए कर्जदार: बैंकों के लिए फंड की लागत नहीं बढ़ी है, इसलिए नई दरें भी फिलहाल स्थिर रहने की उम्मीद है। हालांकि, विशेषज्ञ मान रहे हैं कि पिछली कुछ तिमाहियों में हुई 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती का पूरा लाभ अब बैंक ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं।
डिजिटल सुरक्षा के लिए बड़ा ऐलान
कर्ज की दरों के अलावा, गवर्नर मल्होत्रा ने डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। आरबीआई अब धोखाधड़ी (Fraudulent Transactions) का शिकार होने वाले ग्राहकों को ₹25,000 तक का मुआवजा देने के लिए एक नया फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है। इसके अलावा, वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण (Authentication) जैसे सुरक्षा उपाय भी लागू किए जाएंगे।





