ईरान-इजराइल युद्ध और भारत की 'तेल नीति': क्या बढ़ेगी पेट्रोल-डीजल की किल्लत? मंत्रालय का बड़ा खुलासा!

ईरान-इजराइल युद्ध के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पेट्रोलियम मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी जानकारी। जानें क्या हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से भारत में तेल संकट आएगा?

ईरान-इजराइल युद्ध और भारत की 'तेल नीति': क्या बढ़ेगी पेट्रोल-डीजल की किल्लत? मंत्रालय का बड़ा खुलासा!
मंत्रालय का बड़ा खुलासा

India's Energy Security & West Asia Conflict: पश्चिम एशिया (West Asia) में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच छिड़ा संघर्ष अब केवल मिसाइलों तक सीमित नहीं रह गया है। इसका सीधा असर दुनिया की 'लाइफलाइन' कहे जाने वाले समुद्री रास्तों और तेल की कीमतों पर पड़ रहा है।

हाल ही में भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देश को अपनी ऊर्जा स्थिति के बारे में आश्वस्त किया है। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस युद्ध का भारत की रसोई और आपकी जेब पर क्या असर होने वाला है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का संकट

दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और भारत की 90% से अधिक LPG (रसोई गैस) हॉर्मुज के रास्ते से आती है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण यह रास्ता असुरक्षित हो गया है।

मंत्रालय ने जानकारी दी है कि वर्तमान में 28 भारतीय जहाज और सैकड़ों नाविक इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिनकी सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना 'ऑपरेशन संकल्प' के तहत अलर्ट पर है।

मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस के 5 बड़े अपडेट

  1. सप्लाई अब भी सुरक्षित: पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, भारत ने अपनी तेल आपूर्ति का 70% हिस्सा अब हॉर्मुज के बाहर के स्रोतों (जैसे रूस, अमेरिका और पश्चिमी अफ्रीका) से सुरक्षित कर लिया है। युद्ध से पहले यह केवल 55% था।

  2. LPG और CNG पर प्राथमिकता: सरकार ने 'नेचुरल गैस कंट्रोल ऑर्डर 2026' लागू कर दिया है। इसके तहत घरों में आने वाली PNG और वाहनों की CNG की आपूर्ति में कोई कटौती नहीं की जाएगी। उद्योगों और उर्वरक (Fertilizer) प्लांट की गैस में मामूली कटौती कर घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है।

  3. LPG उत्पादन में 28% की वृद्धि: रसोई गैस की संभावित कमी को देखते हुए भारतीय रिफाइनरियों को प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल केवल घरेलू गैस बनाने के लिए करने का निर्देश दिया गया है, जिससे उत्पादन में 28% की बढ़ोतरी हुई है।

  4. पेट्रोल-डीजल की कीमतें: कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल की ओर बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार टैक्स एडजस्टमेंट और तेल कंपनियों के मार्जिन के जरिए कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रही है।

  5. रूस से बढ़ी नजदीकी: युद्ध के बीच भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद और बढ़ाने के संकेत दिए हैं। अमेरिका ने भी विशेष परिस्थितियों को देखते हुए भारत को इसके लिए 30 दिनों की विशेष छूट (Waiver) दी है।


आम जनता पर क्या होगा असर?

हालांकि सरकार ने सप्लाई चेन को लेकर आश्वस्त किया है, लेकिन शिपिंग लागत और इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ने के कारण आने वाले समय में कुछ वस्तुओं की कीमतों में 10-15% का उछाल देखा जा सकता है। विशेष रूप से उन उद्योगों पर असर पड़ेगा जो पेट्रोकेमिकल्स और नैफ्था का उपयोग करते हैं।

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने तेल आयात के स्रोतों में जो विविधता (Diversification) लाई है, वह आज इस संकट के समय में 'सुरक्षा कवच' का काम कर रही है। सरकार स्थिति पर 24x7 नजर रखे हुए है और फिलहाल घबराने (Panic Buying) की कोई जरूरत नहीं है।

Disclaimer: यह रिपोर्ट आधिकारिक मंत्रालयों के बयानों और मौजूदा वैश्विक स्थिति पर आधारित है। अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट से जुड़े रहें।