भारत का 'गुप्त कवच': रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) और देश की ऊर्जा सुरक्षा

"भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) क्या हैं? विशाखापत्तनम, मंगलौर और पादुर में स्थित इन गुप्त तेल भंडारों की पूरी जानकारी और देश की ऊर्जा सुरक्षा में इनका महत्व जानें।"

भारत का 'गुप्त कवच': रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) और देश की ऊर्जा सुरक्षा
भारत का 'गुप्त कवच

नई दिल्ली: किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा सुरक्षा उसकी रीढ़ होती है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता होने के नाते, भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए एक अभेद्य 'गुप्त कवच' तैयार किया है। जिसे हम रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve - SPR) के रूप में जानते हैं।

1. क्या है रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR)?

रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार कच्चे तेल का वह विशाल स्टॉक है जिसे सरकार आपातकालीन स्थितियों के लिए जमीन के अंदर सुरक्षित रखती है। यह भंडार प्राकृतिक आपदाओं, युद्ध, या वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में किसी बड़े व्यवधान (जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य में समस्या) के समय काम आता है।

2. भारत के प्रमुख रणनीतिक तेल भंडार स्थल

भारत सरकार ने 'इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व लिमिटेड' (ISPRL) के माध्यम से तीन मुख्य स्थानों पर भूमिगत रॉक कैवर्न (चट्टानी गुफाओं) में तेल भंडारण की सुविधा बनाई है:

  • विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश): यहाँ 1.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) की क्षमता है।

  • मंगलुरु (कर्नाटक): यहाँ 1.5 MMT की क्षमता है।

  • पादुर (उडुपी, कर्नाटक): यहाँ 2.5 MMT की क्षमता है।

ये तीनों साइटें कुल 5.33 MMT की भंडारण क्षमता प्रदान करती हैं, जो देश की लगभग 9-10 दिनों की कच्चे तेल की खपत को पूरा करने में सक्षम हैं।

3. ये 'भूमिगत गुफाएँ' ही क्यों?

अक्सर सवाल उठता है कि तेल को ज़मीन के ऊपर बड़े टैंकों में क्यों नहीं रखा जाता?

  • सुरक्षा: भूमिगत रॉक कैवर्न प्राकृतिक आपदाओं (जैसे चक्रवात) और बाहरी हमलों (मिसाइल या ड्रोन) से सुरक्षित रहते हैं।

  • लागत और पर्यावरण: ये टैंकों की तुलना में लंबे समय के भंडारण के लिए सस्ते और पर्यावरण के अनुकूल होते हैं।

  • हाइड्रोलिक सीलिंग: इन गुफाओं में जल-परदा (Water Curtain) प्रणाली का उपयोग किया जाता है, जो तेल को बाहर लीक होने से रोकती है।

4. विस्तार की योजना (Phase-II)

भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए दूसरे चरण (Phase-II) पर काम कर रहा है। सरकार ने ओडिशा के चंडीखोल (4 MMT) और कर्नाटक के पादुर में अतिरिक्त विस्तार (2.5 MMT) को मंजूरी दी है। इनके पूरा होने पर भारत की रणनीतिक क्षमता बढ़कर 11.83 MMT तक पहुँच जाएगी।

5. ऊर्जा सुरक्षा का व्यापक बफर

रणनीतिक भंडारों के अलावा, भारत की रिफाइनरियों और तेल कंपनियों के पास अपना अलग कमर्शियल स्टॉक भी होता है। इन सबको मिलाकर भारत के पास वर्तमान में लगभग 74 से 80 दिनों का कुल ऊर्जा बफर मौजूद है, जो भारत को वैश्विक अनिश्चितताओं से बचाता है।

आज के भू-राजनीतिक परिदृश्य में, जहाँ पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई चेन में व्यवधान एक आम चुनौती है, ये रणनीतिक भंडार भारत के लिए एक सुरक्षा कवच हैं। ये केवल तेल की कमी नहीं पूरा करते, बल्कि वैश्विक बाजार में कीमतों की अस्थिरता के समय देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने का काम भी करते हैं।