ईरान में महा-हड़कंप: क्या अपनों ने ही की गद्दारी? पूर्व राष्ट्रपति और खुफिया प्रमुख पर जासूसी का संगीन आरोप!

ईरान के सत्ता गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब पूर्व राष्ट्रपति और खुफिया विभाग के बड़े अधिकारियों पर अमेरिका और इजरायल के लिए जासूसी करने के आरोप लगे। जानिए इस 'इनफिल्ट्रेशन' का पूरा सच।

ईरान में महा-हड़कंप: क्या अपनों ने ही की गद्दारी? पूर्व राष्ट्रपति और खुफिया प्रमुख पर जासूसी का संगीन आरोप!
ईरान के पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी, पूर्व विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ (Photo- ITG)

ईरान में गद्दारी की गूंज: जब सत्ता के सबसे ऊंचे शिखर पर बैठे लोगों पर लगे जासूसी के आरोप

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहा संघर्ष अब केवल सीमाओं और मिसाइलों तक सीमित नहीं रह गया है। हाल ही में आई रिपोर्ट्स और ईरान के भीतर से उठ रही आवाजों ने एक ऐसी कड़वी सच्चाई को उजागर किया है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। आरोप है कि ईरान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली खुफिया एजेंसियों और यहाँ तक कि राष्ट्रपति कार्यालय तक में सीआईए (CIA) और मोसाद (Mossad) के एजेंटों ने पैठ बना ली है।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन आरोपों के घेरे में वे लोग हैं जो 8 साल तक देश के राष्ट्रपति रह चुके हैं और वे भी जो कभी ईरान की खुफिया सुरक्षा के सर्वेसर्वा थे।


1. 8 साल तक राष्ट्रपति रहे दिग्गज पर सवाल?

ईरान के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा नई नहीं है, लेकिन 2026 के तनावपूर्ण माहौल में इसने नया मोड़ ले लिया है। पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद (Mahmoud Ahmadinejad), जो 2005 से 2013 तक (8 साल) ईरान के राष्ट्रपति रहे, उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में यह कहकर सनसनी फैला दी थी कि ईरान की 'इजरायल विरोधी इकाई' (Anti-Israel Unit) का प्रमुख ही खुद एक इजरायली एजेंट निकला।

अहमदीनेजाद का यह खुलासा इशारा करता है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल ठिकानों की जानकारी बाहर भेजने वाले कहीं न कहीं सत्ता के बहुत करीब बैठे लोग हैं।

2. पूर्व खुफिया मंत्री का कबूलनामा: 'मोसाद हर जगह है'

आरोपों की इस कड़ी में दूसरा बड़ा नाम पूर्व खुफिया मंत्री अली युनेसी (Ali Younesi) का आता है। युनेसी ने चेतावनी देते हुए यहाँ तक कह दिया था कि:

"ईरान के अधिकारियों को अब अपनी जान की फिक्र करनी चाहिए, क्योंकि मोसाद ने देश के विभिन्न हिस्सों और सुरक्षा तंत्र में इतनी गहरी पैठ बना ली है कि अब कोई भी सुरक्षित नहीं है।"

यह बयान उस वक्त और भी सच साबित होता दिखा जब ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या हुई और उनके सबसे सुरक्षित सैन्य ठिकानों पर सटीक ड्रोन हमले किए गए।


3. 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' और आंतरिक सफाई (Purge)

अप्रैल 2026 में जारी 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' के बीच, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने अपने ही अंदर एक 'मैसिव हंट' (तलाश) शुरू की है। रिपोर्ट्स के अनुसार:

  • लगभग 30 से अधिक उच्च पदस्थ अधिकारियों को हिरासत में लिया गया है।

  • इन पर अमेरिका और इजरायल को सेना की मूवमेंट और सुप्रीम लीडर के ठिकानों की जानकारी देने का संदेह है।

  • यह माना जा रहा है कि हाल ही में ईरान के 'B1 ब्रिज' और अन्य महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए सटीक हमलों के पीछे यही 'इनसाइडर इंफॉर्मेशन' थी।


4. क्या यह महज राजनीतिक साजिश है?

विशेषज्ञों का एक वर्ग यह भी मानता है कि ईरान के नए नेतृत्व (मोज्तबा खामेनेई के दौर में) के तहत यह 'जासूसी' के आरोप असल में पुराने दिग्गजों को रास्ते से हटाने का एक तरीका भी हो सकते हैं। जब भी किसी देश का सुरक्षा तंत्र विफल होता है, तो अक्सर 'आंतरिक गद्दारों' की थ्योरी पेश की जाती है ताकि नेतृत्व की विफलता को छिपाया जा सके।


 खोखला होता सुरक्षा तंत्र?

चाहे ये आरोप पूरी तरह सच हों या केवल राजनीतिक चाल, एक बात साफ है—ईरान का सुरक्षा तंत्र अब पहले जैसा अभेद्य नहीं रहा। अगर देश का नेतृत्व करने वाले और जासूसी रोकने वाले ही जासूसी के घेरे में आ जाएं, तो किसी भी देश के लिए युद्ध जीतना नामुमकिन हो जाता है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ईरान इन 'गद्दारों' के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई करता है या यह विवाद उसे अंदर से और भी कमजोर कर देगा।