अयोध्या राम मंदिर में 'नौकरी के बदले रिश्वत'? पुलिस जांच के घेरे में ट्रस्ट के बड़े सदस्य, 125 नियुक्तियों पर शक की सुई!
अयोध्या राम मंदिर में नियुक्तियों के लिए रिश्वत लेने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। अविनाश शुक्ला के खुलासे के बाद पुलिस अब ट्रस्ट के एक रसूखदार सदस्य और उनके रिश्तेदारों की भूमिका की जांच कर रही है।
राम मंदिर में 'रिश्वत लेकर नौकरियां'? अयोध्या पुलिस की रडार पर ट्रस्ट के बड़े सदस्य; 125 अवैध नियुक्तियों का भंडाफोड़!
अयोध्या/लखनऊ (विशेष खोजी ब्यूरो - 2 जुलाई, 2026): राम नगरी अयोध्या से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली और गंभीर खबर सामने आ रही है। श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि की कथित हेराफेरी (Donation Theft Case) की जांच कर रही अयोध्या पुलिस के हाथ अब एक और बड़ा और सनसनीखेज सुराग लगा है।
इस पूरे नेक्सस का खुलासा होने के बाद पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) की सुई अब सीधे तौर पर राम मंदिर ट्रस्ट के एक रसूखदार सदस्य की ओर घूम गई है।
1. मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला ने उगले राज, ऐसे हुआ खुलासा
मामले की जांच में जुटी एसआईटी (SIT) और अयोध्या पुलिस ने जब दान चोरी के मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला से सघन पूछताछ की, तो इस नए रैकेट की परतें खुलनी शुरू हुईं।
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ट्रस्ट सदस्य का नाम बार-बार आया सामने: पूछताछ के दौरान अविनाश शुक्ला ने एक ट्रस्ट सदस्य के नाम का बार-बार जिक्र किया।
उसने बताया कि प्रशासनिक और मैनपावर नियुक्तियों में इस सदस्य की सीधी मर्जी और रसूख काम कर रहा था। -
125 कर्मचारियों पर गहराया शक: खुफिया सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर प्रतिष्ठान में अलग-अलग पदों पर लगभग 125 कर्मचारियों की भर्ती की गई थी, जिनके लिए उम्मीदवारों से कथित तौर पर मोटी रकम वसूली गई।
2. गायब हैं कागजात: बिना जॉइनिंग लेटर के हो रही थी ड्यूटी!
जब जांच अधिकारियों ने मंदिर के प्रशासनिक रिकॉर्ड और कर्मचारियों के सेवा अनुबंधों (Service Contracts) की स्क्रूटनी शुरू की, तो उनके होश उड़ गए।
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दस्तावेजों का अकाल: पुलिस को जांच के दौरान कई नियुक्त कर्मचारियों के पास से न तो कोई आधिकारिक अपॉइंटमेंट लेटर (Appointment Letter) मिला और ना ही कोई औपचारिक सर्विस एग्रीमेंट।
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बिना वेरिफिकेशन तैनाती: इससे यह साफ संकेत मिलता है कि बैकडोर एंट्री के जरिए सीधे पदों पर लोगों को बैठाया गया।
पुलिस अब उस विशिष्ट प्राधिकारी (Authority) की पहचान करने में जुटी है, जिसके मौखिक या लिखित आदेश पर ये नियुक्तियां की गईं।
3. रडार पर रिश्तेदार: अनुकल्प और लवकुश मिश्रा की भूमिका पर जांच
इस मामले में केवल ट्रस्ट सदस्य ही नहीं, बल्कि उनके करीबी रिश्तेदार भी पुलिस की पैनी नजर के घेरे में आ चुके हैं।
4. बैंक खातों और बेनामी संपत्तियों की होगी फॉरेंसिक जांच
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शुरुआती एसआईटी रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद, पुलिस ने इस जांच के दायरे को वैज्ञानिक और वित्तीय स्तर पर और बड़ा कर दिया है।
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मनी ट्रेल की ट्रैकिंग: पुलिस अब सभी 125 संदिग्ध नियुक्त कर्मचारियों और आरोपियों के बैंक खातों की कड़ियों (Financial Transactions) को खंगाल रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि रिश्वत का पैसा ऑनलाइन ट्रांजेक्शन या किस माध्यम से ट्रांसफर हुआ।
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संपत्ति की जांच: इसके अलावा, संदिग्ध ट्रस्ट सदस्य की संपत्तियों की भी जांच शुरू कर दी गई है।
यह देखा जा रहा है कि ट्रस्ट से जुड़ने के बाद क्या उनकी संपत्तियों में कोई असामान्य या बेहिसाब बढ़ोतरी (Disproportionate Increase in Assets) हुई है।
आस्था के केंद्र में पारदर्शिता की उम्मीद
राम मंदिर करोड़ों सनातनियों की अटूट आस्था का प्रतीक है। ऐसे पवित्र स्थान पर इस प्रकार के कथित भ्रष्टाचार और धांधली के सामने आने से श्रद्धालु बेहद आहत हैं। हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।





