वैभव सूर्यवंशी का दलीप ट्रॉफी में महा-धमाका: 92 रनों की तूफानी पारी से तोड़ा 57 साल पुराना रिकॉर्ड, आउट होकर पटका बैट तो आरपी सिंह भी रह गए हैरान!
15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल में सेंट्रल ज़ोन के खिलाफ 81 गेंदों में 92 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेलकर 57 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। शतक से चूकने पर उनके गुस्से और चयनकर्ता आरपी सिंह के रिएक्शन की पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
57 साल पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त, 92 रन पर आउट होने पर बैट पटका तो हक्के-बक्के रह गए चयनकर्ता आरपी सिंह!
बेंगलुरु (स्पोर्ट्स डेस्क - 31 अगस्त, 2026): भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास में आज एक नया स्वर्णिम पन्ना लिख दिया गया है। बेंगलुरु के बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ग्राउंड में खेले जा रहे दलीप ट्रॉफी 2026 के सेमीफाइनल मुकाबले में 15 वर्षीय युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से तहलका मचा दिया।
ईस्ट ज़ोन (East Zone) की ओर से ओपनिंग करने उतरे वैभव ने सेंट्रल ज़ोन (Central Zone) के गेंदबाजों की जमकर धज्जियां उड़ाईं और महज 81 गेंदों पर 92 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेल डाली, जिसमें 7 शानदार चौके और 7 गगनचुंबी छक्के शामिल रहे।
हालाँकि, महज 8 रन से अपना पहला दलीप ट्रॉफी शतक चूकने के बाद मैदान पर जो ड्रामा देखने को मिला, उसने स्टैंड्स में बैठे राष्ट्रीय चयनकर्ताओं तक को हैरान कर दिया।
1. 57 साल पुराना ऐतिहासिक रिकॉर्ड ध्वस्त
वैभव सूर्यवंशी ने जैसे ही अपनी फिफ्टी पूरी की, उन्होंने दलीप ट्रॉफी के 57 साल पुराने इतिहास को मिटा दिया।
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बने सबसे युवा अर्धशतकवीर: महज 15 साल और 157 दिन की उम्र में दलीप ट्रॉफी में अर्धशतक जमाकर वैभव इस टूर्नामेंट के इतिहास में फिफ्टी लगाने वाले सबसे युवा बल्लेबाज बन गए हैं।
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किसका रिकॉर्ड टूटा?: उन्होंने साल 1969 में लक्ष्मण सिंह द्वारा बनाया गया 57 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 16 साल और 23 दिन की उम्र में दलीप ट्रॉफी में फिफ्टी जड़ी थी।
2. 92 रन पर टूटा शतक का सपना, गुस्से में पटका बैट
सेंट्रल ज़ोन के पहली पारी के 266 रनों के जवाब में ईस्ट ज़ोन को वैभव ने तूफानी शुरुआत दिलाई। लेकिन जब वह 92 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे, तब स्पिनर हर्ष दुबे की गेंद पर बाउंड्री क्लियर करने के प्रयास में वे डीप मिड-विकेट पर कैच आउट हो गए।
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पवेलियन लौटते वक्त जबरदस्त गुस्सा: शतक से केवल 8 रन दूर रह जाने का दर्द वैभव के चेहरे पर साफ दिखाई दिया। आउट होने के बाद पवेलियन लौटते समय उन्होंने निराशा और गुस्से में अपना बल्ला (Bat) जमीन पर पटक दिया और अपना सिर पकड़ लिया।
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फर्स्ट-क्लास करियर का उच्चतम स्कोर: भले ही वे शतक से चूक गए, लेकिन 92 रन का यह स्कोर दलीप ट्रॉफी में उनका सर्वोच्च स्कोर और उनके फर्स्ट-क्लास करियर का दूसरा सबसे बड़ा स्कोर बन गया है (उनका सर्वश्रेष्ठ 93 रन है)।
3. स्टैंड्स में बैठे चयनकर्ता आरपी सिंह भी रह गए दंग!
बीसीसीआई की नई चयन नीति के तहत दलीप ट्रॉफी के नॉकआउट मैचों में राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की उपस्थिति अनिवार्य की गई है। इस मुकाबले को देखने के लिए भारत के पूर्व तेज गेंदबाज और वर्तमान राष्ट्रीय चयनकर्ता आरपी सिंह (RP Singh), अजय रात्रा और एसएस दास ग्राउंड पर मौजूद थे।
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चयनकर्ताओं के उड़े होश: जैसे ही वैभव 92 के स्कोर पर आउट हुए और उन्होंने निराशा में अपना बैट पटका, स्टैंड्स में बैठे आरपी सिंह का रिएक्शन देखने लायक था। 15 साल के इस लड़के की आक्रामकता, क्लास और शतक चूकने के बाद की जिद देखकर आरपी सिंह खुद हक्के-बक्के और हैरान रह गए।
4. रेड-बॉल क्रिकेट में एक नए स्टार का उदय
अब तक वैभव सूर्यवंशी को मुख्यतः सफेद गेंद (White-Ball) के विस्फोटक फॉर्मेट्स के लिए जाना जाता था। लेकिन दलीप ट्रॉफी की इस 92 रनों की पारी ने साबित कर दिया है कि वे लाल गेंद (Red-Ball) के क्रिकेट की बारीकियों को भी बहुत तेजी से सीख रहे हैं। उन्होंने अपनी पारी में आक्रामक शॉट्स के साथ-साथ डिफेंस, संयम और स्ट्राइक रोटेट करने की परिपक्वता भी दिखाई।
भारतीय क्रिकेट का उज्ज्वल भविष्य
वैभव सूर्यवंशी की यह पारी सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य कितने सुरक्षित और निडर हाथों में है। भले ही शतक 8 रन दूर रह गया हो, लेकिन चयनकर्ताओं के दिल में उन्होंने अपनी एक अमिट छाप छोड़ दी है।





