बिश्केक में SCO Summit 2026: पीएम मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग की महा-बैठक; जानें 5 सबसे बड़े कूटनीतिक मुद्दे!

बिश्केक में 26वें SCO शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग एक मंच पर आए हैं। भारत-रूस द्विपक्षीय वार्ता, क्षेत्रीय सुरक्षा और सीमा मुद्दों पर वैश्विक रिपोर्ट पढ़ें।

बिश्केक में SCO Summit 2026: पीएम मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग की महा-बैठक; जानें 5 सबसे बड़े कूटनीतिक मुद्दे!
बिश्केक में SCO Summit 2026

बिश्केक में SCO Summit 2026 की गूंज: पीएम मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग एक मंच पर; जानिए वैश्विक भू-राजनीति के 5 सबसे बड़े मुद्दे!

बिश्केक/नई दिल्ली (अंतरराष्ट्रीय डेस्क): किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 26वाँ शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। यह शिखर सम्मेलन SCO संगठन की 25वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक अवसर पर हो रहा है, जिसकी अध्यक्षता किर्गिज़ राष्ट्रपति सादिर जापारोव कर रहे हैं।

यूूरेशियाई महाद्वीप के सबसे शक्तिशाली देशों के राष्ट्राध्यक्ष—भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान और पाकिस्तानी पीएम शहबाज़ शरीफ—एक ही छत के नीचे मौजूद हैं। वैश्विक तनाव, पश्चिम एशिया संकट और सीमा सुरक्षा के बीच बिश्केक से निकल रहे कूटनीतिक संकेत पूरी दुनिया का ध्यान खींच रहे हैं।

1. PM मोदी और व्लादिमीर पुतिन की अहम द्विपक्षीय वार्ता

बिश्केक शिखर सम्मेलन के इतर (On the sidelines) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक निर्धारित की गई है।

  • व्यापार और ऊर्जा सहयोग: हाल ही में मॉस्को में संपन्न हुई भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC) की बैठक के निर्णयों को आगे बढ़ाते हुए दोनों नेता रक्षा आपूर्ति, पेमेंट मैकेनिज्म और ऊर्जा साझेदारी की समीक्षा कर रहे हैं।

  • शांति का संदेश: पीएम मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत के रुख को दोहराते हुए कूटनीति और संवाद (Diplomacy and Dialogue) के जरिए शांति का संदेश दिया है।

2. PM मोदी और शी जिनपिंग: मंच साझा, कूटनीतिक रिश्तों पर नजर

सीमा पर गश्त और डी-एस्केलेशन (De-escalation) सहमति के बाद पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक बार फिर SCO के मुख्य सत्र में मंच साझा कर रहे हैं।

  • बॉर्डर टॉक का असर: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच बीजिंग में हुई सकारात्मक वार्ता के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

3. 'SECURE' विजन और आतंकवाद पर भारत का कड़ा रुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने SCO के मंच से भारत के प्राथमिकता वाले सिद्धांतों—Security (सुरक्षा), Connectivity (कनेक्टिविटी) और Opportunity (अवसर)—पर जोर दिया।

  • आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस: भारत ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद, अलगाववाद और कट्टरपंथ (Terrorism, Separatism and Extremism) पूरे क्षेत्र की शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं और बिना किसी दोहरे मापदंड के इसके खिलाफ साझा कार्रवाई होनी चाहिए।

4. चाबहार पोर्ट और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC)

कनेक्टिविटी पर चर्चा के दौरान भारत ने मध्य एशियाई देशों (Central Asian Republics) के साथ व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए ईरान के चाबहार बंदरगाह और INSTC प्रोजेक्ट के इस्तेमाल पर जोर दिया। भारत ने दोहराया कि कोई भी बुनियादी ढांचा परियोजना क्षेत्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हुए ही आगे बढ़नी चाहिए।

5. पश्चिम एशिया और वैश्विक संघर्षों पर संयुक्त घोषणापत्र

पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और गाजा-इज़राइल स्थिति पर भी 10 सदस्यीय देशों के प्रमुखों ने विचार-विमर्श किया। SCO सम्मेलन के समापन पर 'बिश्केक घोषणापत्र' (Bishkek Declaration) अपनाए जाने की संभावना है, जो बहुध्रुवीय विश्व (Multipolar World) और क्षेत्रीय आर्थिक विकास का रोडमैप तैयार करेगा।

मध्य एशिया में भारत की मजबूत मौजूदगी

उज्बेकिस्तान यात्रा के बाद किर्गिस्तान पहुंचे पीएम मोदी की यह यात्रा भारत के 'विस्तारित पड़ोस' (Extended Neighbourhood) नीति को मजबूत करती है। वर्ल्ड नोमैड गेम्स (World Nomad Games) में भागीदारी से लेकर द्विपक्षीय बैठकों तक, भारत ने बिश्केक में अपनी वैश्विक कूटनीतिक छाप छोड़ी है।