जयशंकर का एक फोन और मान गया ईरान: Strait of Hormuz से अब बेखौफ गुजरेंगे भारतीय जहाज
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के बीच हुई बातचीत के बाद भारतीय जहाजों को Strait of Hormuz से सुरक्षित रास्ता मिला। जानें कैसे भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित किया।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण युद्ध और तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत सामने आई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अरागची (Seyed Abbas Araghchi) के बीच हुई फोन कॉल के बाद, ईरान ने भारतीय जहाजों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब ईरान ने इस मार्ग को अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों के लिए लगभग बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट मंडरा रहा था।
कूटनीति का असर: भारत को मिली 'सेफ पैसेज'
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार, 10 मार्च 2026 को ईरानी विदेश मंत्री अरागची के साथ विस्तृत चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक, इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करना था। ईरान ने आश्वासन दिया है कि भारतीय झंडे वाले (India-flagged) जहाजों को इस मार्ग से गुजरने में कोई बाधा नहीं आएगी।
-
पुष्पक और परिमल की सफल वापसी: इस समझौते का असर तुरंत देखने को मिला है। 'पुष्पक' और 'परिमल' नामक दो भारतीय टैंकर इस खतरनाक रास्ते से सुरक्षित बाहर निकल आए हैं।
-
पहला टैंकर पहुंचा मुंबई: इसी बीच, सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर आ रहा जहाज 'शेनलोंग स्वेज़मैक्स' (Shenlong Suezmax) भी हॉर्मुज को पार कर मुंबई पोर्ट पहुंच गया है। इस जहाज की कमान एक भारतीय कैप्टन के हाथों में थी।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
Strait of Hormuz दुनिया का सबसे संवेदनशील 'चोकपॉइंट' (Chokepoint) है।
-
दुनिया के कुल तेल निर्यात का लगभग 20-30% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
-
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों (Crude Oil and LNG) का 50% से अधिक हिस्सा इसी मार्ग के जरिए आयात करता है।
-
वर्तमान संघर्ष के कारण तेल की कीमतें $100 के पार पहुंचने का खतरा था, जिसे इस कूटनीतिक कदम ने काफी हद तक कम कर दिया है।
भारत की 'बैलेंस्ड' विदेश नीति
युद्ध के इस दौर में भारत ने एक बार फिर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का लोहा मनवाया है। एक तरफ भारत के अमेरिका और इजरायल के साथ मजबूत संबंध हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान के साथ ऐतिहासिक और रणनीतिक रिश्ते (जैसे चाबहार पोर्ट) भारत के काम आए हैं। जयशंकर ने न केवल ईरान, बल्कि रूस और फ्रांस के विदेश मंत्रियों से भी इस मुद्दे पर बात की है ताकि वैश्विक व्यापार में स्थिरता बनी रहे।
ईरान के इस फैसले से भारत में रसोई गैस (LPG) और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में होने वाली संभावित बढ़ोतरी पर लगाम लगने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी कैबिनेट बैठक में मंत्रियों को निर्देश दिया है कि वे आपूर्ति श्रृंखला को लेकर फैलने वाली किसी भी अफवाह को सख्ती से रोकें।





