नेपाल जलप्रलय: अज्ञात शवों के DNA सैंपलिंग का बड़ा फैसला, 3000 लापता लोगों की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन तेज!
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और मलबे के बीच 680 से अधिक शव बरामद। पीएम बालेन शाह ने अज्ञात शवों के DNA सैंपल और डिजिटल जियो-टैगिंग के बाद अंतिम संस्कार के निर्देश दिए। पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट।
नेपाल में कुदरत का कहर: अज्ञात शवों की पहचान के लिए DNA प्रोफाइलिंग का सहारा
हिमालयी देश नेपाल में ग्लेशियर फटने और मूसलाधार बारिश के बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में आए सैलाब और मलबे के कारण अब तक 680 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि करीब 3,000 लोग अभी भी लापता हैं। बाढ़ की भीषणता और मलबे के कारण कई शवों की शिनाख्त करना बेहद मुश्किल हो गया है।
इस मानवीय संकट को देखते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र (बालेन) शाह ने राहत, बचाव और शवों के प्रबंधन को लेकर एक अहम प्रोटोकॉल लागू करने की घोषणा की है।
DNA सैंपलिंग और डिजिटल रिकॉर्डिंग का नया प्रोटोकॉल
शवों की स्थिति और संक्रामक बीमारियों के जोखिम को देखते हुए सरकार ने 'अनआइडेंटिफाइड बॉडीज मैनेजमेंट डायरेक्टिव' के तहत कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
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DNA सैंपल और जियो-टैगिंग: जिन अज्ञात शवों की तत्काल पहचान नहीं हो पा रही है, उनके DNA सैंपल, उंगलियों के निशान (Thumbprints), डेंटल रिकॉर्ड और तस्वीरें डिजिटल रूप से सुरक्षित की जाएंगी।
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यूनिक आईडी और सामान का संरक्षण: प्रत्येक शव को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी। उनके पास से मिले कपड़े, आभूषण, पहचान पत्र और निजी सामान अलग-अलग सील करके रखे जाएंगे ताकि भविष्य में परिजनों द्वारा पहचान की जा सके।
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सम्मानजनक अंतिम संस्कार: मोर्चरी की सीमित क्षमता के कारण कानूनी औपचारिकताएं और वैज्ञानिक साक्ष्य दर्ज करने के बाद अज्ञात शवों को निर्धारित स्थानों (जैसे चितवन के देवघाट) पर दफनाया जाएगा। जिन शवों की पहचान हो चुकी है, उन्हें सीधे परिजनों को सौंपा जा रहा है।
लापता लोगों की तलाश और ग्राउंड जीरो के हालात
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प्रभावित जिले: रसुवा, धाडिंग, नुवाकोट, चितवन, तनहुं, गोरखा और नवलपरासी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। रसुवा से बहकर सैकड़ों किलोमीटर दूर चितवन नदी के किनारों तक शव मिले हैं।
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विदेशी नागरिक भी लापता: लापता 3,000 लोगों में 500 से अधिक विदेशी नागरिक शामिल हैं, जिनमें 275 से अधिक भारतीय नागरिक भी दर्ज हैं।
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हवाई व जमीनी रेस्क्यू: मौसम में थोड़ा सुधार होने के बाद सेना, पुलिस और आपदा प्रबंधन बलों ने हेलिकॉप्टरों की मदद से सुदूर पर्वतीय घाटियों में फंसे लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने और खोज अभियान को फिर से तेज कर दिया है।





