निर्वासन से सत्ता तक: तारीक रहमान की ऐतिहासिक जीत और बांग्लादेश की नई शुरुआत

17 साल के निर्वासन के बाद तारीक रहमान बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। जानें BNP की ऐतिहासिक जीत और 2026 चुनाव के प्रमुख परिणामों के बारे में विस्तार से।

निर्वासन से सत्ता तक: तारीक रहमान की ऐतिहासिक जीत और बांग्लादेश की नई शुरुआत
तारीक रहमान की ऐतिहासिक जीत

ढाका: बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में 13 फरवरी 2026 का दिन एक बड़े बदलाव के रूप में दर्ज हो गया है। लगभग दो दशकों के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की है। पार्टी के अध्यक्ष तारीक रहमान, जो पिछले 17 वर्षों से लंदन में निर्वासन (Exile) का जीवन बिता रहे थे, अब देश के नए प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार हैं।

गुरुवार (12 फरवरी) को हुए मतदान के परिणामों में BNP और उसके सहयोगियों ने 299 सीटों में से 212 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज की है। इस जीत ने न केवल शेख हसीना के 15 साल के शासन के बाद बने अंतरिम शासन का अंत किया है, बल्कि देश को एक नया नेतृत्व भी दिया है।

निर्वासन से प्रधानमंत्री कार्यालय तक का सफर

60 वर्षीय तारीक रहमान का सत्ता तक पहुंचने का सफर संघर्षों और कानूनी लड़ाइयों से भरा रहा है:

  • लंबे समय तक निर्वासन: तारीक रहमान 2008 में इलाज के बहाने लंदन गए थे और तब से वहीं से डिजिटल माध्यमों के जरिए अपनी पार्टी का संचालन कर रहे थे।

  • वापसी: अगस्त 2024 में 'छात्र आंदोलन' के कारण शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद, तारीक रहमान के खिलाफ चल रहे कई अदालती मामले रद्द कर दिए गए। वे दिसंबर 2025 में स्वदेश लौटे, जहाँ लाखों समर्थकों ने उनका स्वागत किया।

  • दोहरी जीत: तारीक रहमान ने पहली बार सीधे चुनावी मैदान में उतरते हुए दो सीटों— बोगरा-6 और ढाका-17 — से चुनाव लड़ा और दोनों पर ही शानदार जीत हासिल की।

2026 चुनाव की 5 बड़ी और ऐतिहासिक बातें

  1. 35 साल बाद पहला पुरुष प्रधानमंत्री: 1991 के बाद यह पहली बार है जब बांग्लादेश की कमान किसी पुरुष के हाथ में होगी। पिछले साढ़े तीन दशकों से सत्ता केवल खालिदा जिया और शेख हसीना के बीच ही रही है।

  2. अवामी लीग की अनुपस्थिति: शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को इस चुनाव में हिस्सा लेने से रोक दिया गया था, जिससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए।

  3. संविधान में बदलाव का रेफरेंडम: चुनाव के साथ ही देश में एक जनमत संग्रह (Referendum) भी हुआ, जिसमें जनता ने 'जुलाई चार्टर' को मंजूरी दी। इसके तहत अब कोई भी व्यक्ति दो बार से अधिक प्रधानमंत्री नहीं बन सकेगा।

  4. युवाओं का प्रभाव: विश्लेषकों ने इसे दुनिया का पहला 'Gen Z-प्रेरित' चुनाव करार दिया है, जहाँ छात्र आंदोलन की ऊर्जा ने मतदान के रुख को तय किया।

  5. भारत के साथ संबंधों का नया दौर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारीक रहमान को फोन कर ऐतिहासिक जीत की बधाई दी है। तारीक रहमान ने भी 'पारस्परिक सम्मान' के आधार पर भारत के साथ मजबूत रिश्तों की उम्मीद जताई है।

आगे की चुनौतियां

प्रधानमंत्री मनोनीत तारीक रहमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और भ्रष्टाचार पर लगाम कसना है। उन्होंने अपने संबोधन में समर्थकों से बड़े जश्न के बजाय दुआओं में शामिल होने की अपील की है, जो उनके शांत और सुलझे हुए नए राजनीतिक व्यक्तित्व को दर्शाता है।

बांग्लादेश अब एक नए युग की दहलीज पर खड़ा है, जहाँ लोकतंत्र की बहाली और संवैधानिक सुधारों को लागू करना तारीक सरकार की पहली प्राथमिकता होगी।