"सिर्फ अमेरिका से सुना, भारत से नहीं": रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने तेल डील पर अमेरिकी दावों की उड़ाई धज्जियां
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका के उन दावों को खारिज कर दिया है कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर रहा है। जानें क्या है पूरा मामला और भारत का पक्ष।
मॉस्को/नई दिल्ली — पश्चिमी देशों और अमेरिका द्वारा फैलाए जा रहे इस दावे पर कि "भारत प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल (Russian Oil) खरीदना बंद कर रहा है", रूस ने करारा जवाब दिया है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Sergei Lavrov) ने स्पष्ट किया है कि उन्हें नई दिल्ली से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है और यह केवल अमेरिकी अधिकारियों का दुष्प्रचार है।
लावरोव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और G7 देश भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों पर रूसी तेल से दूरी बनाने के लिए कूटनीतिक दबाव बना रहे हैं।
क्या था अमेरिका का दावा? (The US Claim)
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने दावा किया था कि भारत ने अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते (Trade Deal) के तहत रूसी तेल का आयात रोकने पर सहमति जताई है। ट्रम्प ने भारतीय सामानों पर से 25% अतिरिक्त टैरिफ हटाने की घोषणा करते हुए यह शर्त जोड़ी थी कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा।
अमेरिकी नेरेटिव (narrative) यह था कि भारत अब अमेरिकी और वेनेजुएला के तेल विकल्पों की ओर बढ़ रहा है और रूस से अपने ऊर्जा संबंध तोड़ रहा है।
लावरोव का पलटवार: "सिर्फ आपसे ही सुन रहा हूं" (Lavrov's Counter)
बुधवार को रूसी संसद (State Duma) में बोलते हुए सर्गेई लावरोव ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। जब उनसे अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा:
"डोनाल्ड ट्रम्प के अलावा, मैंने किसी और से नहीं सुना कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा। मैंने प्रधानमंत्री मोदी या किसी अन्य भारतीय नेता से ऐसा कोई बयान नहीं सुना है।"
लावरोव ने आगे कहा कि भारत और रूस के संबंध "ईमानदार, सम्मानजनक और पारस्परिक रूप से लाभकारी" हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर कोई समस्या होती है, तो दोनों देश आपस में बात करते हैं, न कि अमेरिकी प्रेस विज्ञप्तियों के माध्यम से।
रूस का मानना है कि अमेरिका "प्रतिबंधों (Sanctions)" और "टैरिफ" का डर दिखाकर भारत जैसे रणनीतिक भागीदारों को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा है ताकि वह वैश्विक ऊर्जा बाजार पर अपना प्रभुत्व जमा सके।
भारत का पक्ष: "ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि" (India's Stance)
इस पूरे विवाद पर भारत ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) और विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने स्पष्ट किया है कि भारत की तेल खरीद नीति केवल "राष्ट्रीय हित" (National Interest) और "ऊर्जा सुरक्षा" (Energy Security) पर आधारित है।
भारत सरकार का कहना है कि वह वहां से तेल खरीदेगा जहां उसे सबसे सस्ती और सुरक्षित आपूर्ति मिलेगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।"
हालांकि भारत ने अमेरिका के साथ व्यापारिक बातचीत का स्वागत किया है, लेकिन उसने आधिकारिक तौर पर रूसी तेल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की किसी भी बात की पुष्टि नहीं की है।
भुगतान की चुनौतियां और भविष्य (Payment Issues & Future)
हालांकि लावरोव ने नीतिगत बदलाव से इनकार किया, लेकिन उन्होंने माना कि व्यापार में कुछ तकनीकी चुनौतियां हैं। विशेष रूप से भुगतान (Payment) को लेकर समस्याएं हैं, क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण डॉलर में व्यापार मुश्किल हो गया है।
-
पेमेंट संकट: रूस के पास भारतीय रुपये का बड़ा भंडार जमा हो गया है, जिसका उपयोग वह आसानी से नहीं कर पा रहा।
-
टैंकर प्रतिबंध: अमेरिका ने रूसी तेल ले जाने वाले कई टैंकरों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स की समस्या बढ़ी है।
इसके बावजूद, लावरोव का बयान यह संकेत देता है कि मास्को और नई दिल्ली के बीच का रणनीतिक गठजोड़ (Strategic Partnership) अभी भी मजबूत है और भारत अमेरिकी दबाव के आगे आसानी से झुकने वाला नहीं है।





