बांग्लादेश चुनाव 2026: पीएम रेस में उतरे तारीक रहमान, अमेरिका सहित दुनिया की नजर
बांग्लादेश चुनाव 2026 में तारीक रहमान पीएम पद की दौड़ में सबसे बड़े दावेदार बनकर उभरे हैं, वहीं अमेरिका सहित वैश्विक शक्तियाँ इस चुनाव पर नजर बनाए हुए हैं।
बांग्लादेश एक बार फिर ऐतिहासिक राजनीतिक मोड़ पर खड़ा है। 2026 में होने वाले आम चुनाव को देश का सबसे अहम चुनाव माना जा रहा है। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सवाल और विपक्ष पर दबाव के बीच अब BNP नेता तारीक रहमान प्रधानमंत्री पद की दौड़ में एक मजबूत चेहरे के रूप में उभरकर सामने आए हैं।
यह चुनाव अब केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अमेरिका सहित कई वैश्विक ताकतों की नजर इस पर टिकी हुई है।
कौन हैं तारीक रहमान?
तारीक रहमान, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र और BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। वह लंबे समय से देश से बाहर रह रहे हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक पकड़ अब भी मजबूत मानी जाती है।
उन्होंने हाल के वर्षों में लगातार लोकतंत्र बहाली, निष्पक्ष चुनाव और विपक्षी दलों के अधिकारों की बात की है।
क्यों अहम है 2026 का चुनाव?
पिछले एक दशक से बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार सत्ता में है। आर्थिक विकास के बावजूद उनकी सरकार पर कई आरोप लगे हैं:
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विपक्ष को दबाने का आरोप
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मीडिया पर नियंत्रण
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चुनाव प्रक्रिया पर सवाल
इसी कारण यह चुनाव लोकतंत्र की अग्निपरीक्षा माना जा रहा है।
अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका
अमेरिका ने साफ कहा है कि वह बांग्लादेश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है। इसके तहत:
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लोकतंत्र को कमजोर करने वालों पर वीज़ा प्रतिबंध
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चुनावी पारदर्शिता पर बयान
को कई लोग विपक्ष के लिए अप्रत्यक्ष समर्थन मान रहे हैं। हालांकि अमेरिका ने किसी उम्मीदवार का नाम नहीं लिया है।
BNP की रणनीति
तारीक रहमान के नेतृत्व में BNP अब:
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युवाओं को जोड़ने
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आर्थिक सुधार का वादा
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न्यायपालिका और प्रेस की स्वतंत्रता
जैसे मुद्दों को सामने रख रही है।
चुनौतियाँ
तारीक रहमान के सामने कई बाधाएँ हैं:
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उनके खिलाफ कानूनी मामले
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देश से बाहर रहना
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सत्ता पक्ष का मजबूत नियंत्रण
फिर भी उनके समर्थकों का मानना है कि जनता बदलाव चाहती है।
बांग्लादेश का भविष्य
अगर यह चुनाव निष्पक्ष हुआ तो यह बांग्लादेश के लोकतांत्रिक इतिहास में नया अध्याय लिख सकता है। दुनिया की निगाहें अब इस चुनाव पर टिकी हैं।





